संवाददाता अजीत कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बैरिया (बलिया)। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर बैरिया तहसील क्षेत्र के नौका टोला कर्ण छपरा में सोमवार को प्रशासन की कार्रवाई से माहौल तनावपूर्ण हो गया। तहसील प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दो मकानों को ध्वस्त करा दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई उन्हें पूरा मुआवजा दिए बिना की गई, जिससे गांव में नाराजगी फैल गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। परशुराम सिंह का मकान ध्वस्त किए जाने के बाद जब बिना सिंह के मकान को गिराने की कोशिश की गई, तो स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते प्रशासन और ग्रामीणों के बीच कहासुनी हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि परशुराम सिंह को चार लाख 85 हजार रुपये, बिना सिंह को 40 लाख रुपये, गणेश सिंह को 21 लाख रुपये, रामआसन सिंह को 56 लाख रुपये, जितेंद्र सिंह ‘हाथी’ को 20 लाख रुपये और वीरेंद्र सिंह को पांच लाख रुपये का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। इसके अलावा कई अन्य परिवारों को मिलाकर करीब 50 लाख रुपये से अधिक का भुगतान अभी तक लंबित है। कार्रवाई के दौरान उपजिलाधिकारी बैरिया आलोक प्रताप सिंह, तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार, क्षेत्राधिकारी बैरिया मोहम्मद फहीम कुरैशी, नायब तहसीलदार दीपक सिंह, प्रभारी निरीक्षक बैरिया बिपिन सिंह समेत भारी पुलिस बल तैनात रहा। इस पूरे मामले पर सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा ने कहा कि जिन मकानों को ध्वस्त किया गया है, उनके मुआवजे की राशि संबंधित खातों में जमा कराई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में आपसी हिस्सेदारी को लेकर विवाद होने के कारण भुगतान अटका है। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शेष बकाया भुगतान जल्द कर दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन किसानों को मुआवजे की राशि पर आपत्ति है, वे न्यायालय का सहारा ले सकते हैं। प्रशासनिक कार्रवाई से आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पूरा मुआवजा नहीं मिलता, तब तक इस तरह की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है। मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।











