रिपोर्टर: योगेश यादव | पीएनपी न्यूज़, महाराष्ट्र
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!महाराष्ट्र के नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के नतीजों ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) की राजनीतिक जमीन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाषा के नाम पर आक्रामक राजनीति करने वाली मनसे इस चुनाव में पूरी तरह खाली हाथ रही। राज्य की 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में हुए चुनावों में पार्टी एक भी नगराध्यक्ष पद जीतने में नाकाम रही।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आ121 दिसंबर को घोषित नतीजों के अनुसार, BJP के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 207 नगराध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज की। इनमें
भाजपा –117 पद
एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना –53 पद
अजित पवार गुट की एनसीपी – 37 पद शामिल हैं।
वहीं विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) को कुल 44 नगराध्यक्ष पदों पर संतोष करना पड़ा।
कांग्रेस –28
उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना 9 शरद पवार गुट की एनसीपी – पद जीत सकी।
इन सबके बीच मनसे का खाता तक न खुलना पार्टी की कमजोर जमीनी पकड़ को उजागर करता है।
लगातार चुनावी हार से जूझ रही मनसे
यह पहली बार नहीं है जब मनसे को ऐसी करारी हार का सामना करना पड़ा हो। अगस्त 2025 में मुंबई BEST कर्मचारी को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी चुनाव में मनसे और शिवसेना (उद्धव गुट) की संयुक्त पैनल को भी एक भी सीट नहीं मिली थी जबकि भाजपा समर्थित पैनल ने सभी 21 सीटों पर कब्जा जमाया था।
इससे पहले नवंबर 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मनसे ने 135 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन पार्टी एक भी सीट जीतने में असफल** रही थी। लगातार मिल रही इन चुनावी पराजयों ने मनसे की रणनीति और भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया ह
15 जनवरी को बीएमसी समेत 29 नगर निगमों के चुनाव
आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर मनसे की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव एक ही चरण में 15 जनवरी 2026 को कराए जाएंगे, जिनमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) भी शामिल है। इन चुनावों के नतीजे 16 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे।
अब बड़ा सवाल यह है कि आने वाले इन अहम निकाय चुनावों में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की पार्टियां गठबंधन में उतरेंगी या नहीं इस पर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।











