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डॉ. बिपुलेंद्र प्रताप सिंह ने बैरिया से शुरू की ‘किसान संवाद यात्रा’, बोले अब फिर चाहिए संपूर्ण क्रांति।
कहा यदि मुआवजा नहीं मिला तो सड़क से सदन तक होगा आंदोलन।
तहसील संवाददाता अजीत कुमार सिंह
बैरिया (बलिया)। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की कर्मभूमि बैरिया से एक बार फिर परिवर्तन और संघर्ष की आवाज़ उठी। सांसद पुत्र एवं युवा समाजवादी नेता डॉ. बिपुलेंद्र प्रताप सिंह ने मंगलवार को “किसान संवाद यात्रा” की शुरुआत करते हुए कहा कि आज देश को फिर से संपूर्ण क्रांति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने जिस व्यवस्था की कल्पना की थी वह भ्रष्टाचारमुक्त, समाजवादी और जनकेंद्रित शासन प्रणाली थी, जहाँ गांव, किसान और सहकारिता विकास के केंद्र में हों। आज भी वही विचार किसानों और युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं।
*“व्यवस्था की जड़ता तोड़नी होगी”*:-
डॉ. सिंह ने कहा कि आज भी व्यवस्था की जड़ता, असंवेदनशीलता और भ्रष्टाचार उसी रूप में मौजूद हैं जैसे जयप्रकाश के दौर में थे। “संवाद यात्रा का उद्देश्य किसानों को जागरूक और संगठित कर उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाना है,” उन्होंने कहा। उन्होंने लोकनायक के आंदोलन की मूल भावना को याद करते हुए कहा, “जयप्रकाश जी ने केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और नैतिक क्रांति की बात की थी। आज हमें वही संपूर्ण परिवर्तन लाना है।”

*फसल बर्बाद, राहत से वंचित किसान*:-
क्षेत्र के किसानों की बदहाली का जिक्र करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि हाल के दिनों में मक्का और धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, जबकि रबी की बुवाई भी गंभीर रूप से प्रभावित है। इसके बावजूद प्रशासन ने किसानों की पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा, “अधिकारियों ने आंशिक क्षति बताकर मुआवजे की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। बटाईदार किसानों की हालत सबसे खराब है फसल बर्बादी के बाद उनके सामने बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दवाई और बेटियों की शादी तक का संकट खड़ा है।”
*मुआवजा नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन*-
डॉ. सिंह ने मांग की कि प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹33,000 की आपदा राहत राशि तत्काल दी जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला तो “किसानों के साथ मिलकर सड़क से सदन तक आंदोलन छेड़ा जाएगा।” उन्होंने कहा, “पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब बलिया का किसान भी चुप नहीं बैठेगा, वह अपने हक के लिए संघर्ष करेगा।”
*‘संवाद से क्रांति’ की ओर कदम*:-
किसान संवाद यात्रा के पहले चरण में डॉ. सिंह ने कई गांवों में किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि ‘संवाद से क्रांति’ की पहल है जो लोकनायक की धरती से एक नई चेतना का संदेश देगी।











