तहसील संवाददाता अजीत कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बैरिया (बलिया)। बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी के बाद बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए तस्कर अब नदियों और सड़कों के साथ-साथ रेल मार्ग को भी सुरक्षित माध्यम बना रहे हैं। सीमा से सटे बलिया के छोटे-बड़े स्टेशनों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में शराब की खेप रेलगाड़ियों के जरिये बिहार भेजी जा रही है।
*सुरेमनपुर सरकारी ठेके से ट्रेन तक सप्लाई*:-
स्थानीय लोगों ने बताया कि सुरेमनपुर सरकारी कंपोजिट दुकान का पिछला दरवाजा सुबह छह बजे से खुल जाता है और वहीं से थोक व खुदरा दोनों रूपों में शराब की पैकेजिंग कर ट्रेन से भेजी जाती है। सियालदह एक्सप्रेस के समय शनिवार को ग्रामीणों ने सुरेमनपुर से रेलवे प्लेटफॉर्म की ओर जाते एक युवक को पकड़ा। जीआरपी को सौंपे गए युवक के बैग से किताबों कॉपियों के बीच शराब की बोतलें मिलीं। पकड़े गए युवक ने अपना नाम नितिन लाल, बाजार समिति साढ़ा ढाला बताया और स्वीकार किया कि वह बिहार के बड़े तस्करों के लिए काम करता है। उसने खुलासा किया कि यहां से भेजी गई खेप छपरा में ऊँचे दाम पर बेची जाती है।
*नदियाँ, सड़कें और अब ट्रेन*:-
तीन तरफ से गंगा और सरयू से घिरा यह इलाका पहले से ही नावों व सड़कों के जरिए तस्करी के लिए सक्रिय रहा है, पर अब रेल मार्ग सबसे मुफीद रास्ता बन गया है। कुछ ट्रेनों का सुरेमनपुर के बाद सीधा छपरा रुख करने से तस्करों को बीच रास्ते जांच की कम चिंता रहती है। जानकारों का कहना है कि रेवती, सुरेमनपुर और बकुल्हां जैसे स्टेशनों से रोजाना यात्रियों के साथ शराब की पेटियां बिहार भेजी जा रही हैं। कई तस्कर रेलवे सुरक्षा बल या स्थानीय कर्मियों को ‘मैनेज’ कर लेते हैं, जिससे खेप आसानी से मंजिल तक पहुंच जाती है।
*महिलाएं बनीं तस्करी की नई ढाल*:-
पुलिस व ग्रामीणों ने यह भी बताया कि तस्करी के इस अवैध धंधे में महिलाओं की भूमिका बढ़ रही है। दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशाली, हाजीपुर और छपरा के तस्कर महिलाओं को कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। महिलाएं बलिया की दुकानों से शराब लेकर बैग या सूटकेस में भरकर ट्रेन से बिहार पहुँच जाती हैं—महिला होने के कारण अक्सर उनकी तलाशी या पूछताछ नहीं होती।
*केंद्रित स्टेशनों की सक्रियता*:-
बलिया–छपरा रेलखंड पर स्थित सुरेमनपुर व बकुल्हां स्टेशन तस्करों के सबसे अहम ठिकाने बन गए हैं। कई तस्कर इन्हीं स्टेशनों से सवार होकर मांझी, रिविलगंज या गौतम स्थान जैसे मध्यवर्ती स्टेशनों पर उतर जाते हैं, जहां से खेप अंतिम गंतव्य तक पहुंचाई जाती है।
*अधिकारियों का रुख*:-
स्थानीय सप्लाई इंस्पेक्टर से जब पूछताछ की गई तो उन्होंने कहा, “अभी मीटिंग में हूं, कुछ देर बाद बात करूंगा।” सुरेमनपुर जीआरपी चौकी प्रभारी ने कहा कि पकड़े गए तस्करों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाती है और आगे भी जारी रहेगी।
*क्या करने की जरूरत है*:-
स्थानीय लोग और जानकार सुझाव दे रहे हैं कि रेलवे प्लेटफॉर्मों पर निगरानी तेज की जाए, दुकानों के पीछे के रास्तों और सुबह के समय की गतिविधियों पर खास नजर रखी जाए, और यात्रियों के सामान की नियमित तौर पर मनमाने तलाशी से बचते हुए विशुद्ध जांच प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही सीमावर्ती थानों व रेलवे पुलिस के बीच समन्वय बढ़ाना जरूरी है ताकि तस्करी की इस श्रृंखला को रोका जा सके।











