तहसील संवाददाता अजीत कुमार सिंह
बैरिया (बलिया)।जनपद बलिया की बैरिया तहसील अंतर्गत प्रीतम छपरा गांव में बीजेपी के सांसद पुत्र डॉ. विपुलेंद्र प्रताप सिंह किसानों को जागरूक करने और उनकी समस्याएं जानने पहुंचे। उन्होंने खेतों का निरीक्षण करते हुए कहा कि सरकार ने आपदा सर्वे के आदेश 3 नवंबर को जारी कर दिए थे, लेकिन यहां के लेखपाल और कानूनगो अब तक सर्वे कार्य शुरू नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों के पास न कोई फैक्ट्री है, न व्यापार उनका जीवन पूरी तरह खेती पर निर्भर है। इस साल दो बार प्राकृतिक आपदा आई, जिससे मक्का जैसी खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। खेतों में पानी भरा होने से अब रवि की बुवाई भी संकट में है। डॉ. सिंह ने कहा, “कार्तिक के महीने में जब किसान खेतों में व्यस्त रहते हैं, आज वे घरों में बैठे हैं। यह दृश्य किसानों की पीड़ा और प्रशासन की निष्क्रियता दोनों को दर्शाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्य की बात यह है कि किसानों की फसल एक महीने से अधिक समय से डूबी हुई है, फिर भी जिला अधिकारी या उप-जिलाधिकारी ने यहां आकर किसानों से उनकी समस्या तक नहीं पूछी। “किसान बहुत धैर्यशील और सहनशील होता है, लेकिन जब उसके सामने खेती ही खत्म हो जाए तो वह टूट जाता है,” उन्होंने कहा।
डॉ. सिंह ने बताया कि बीजेपी के पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह ‘मस्त’ ने इस स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, जिसके बाद सरकार ने राहत राशि तय की चार बीघे की फसल पर ₹33,000 और एक कट्ठा के नुकसान पर ₹2,000 देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने यह अभी बताया कि यदि किसी किसान के गाय की लंपी बीमारी जैसे आपदा से मृत्यु होती है तो सरकार की ओर से ₹30,000 मुआवज़ा देने का भी प्रावधान है।
डॉ. सिंह ने प्रशासन से मांग की कि तत्काल सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवज़ा उपलब्ध कराया जाए।











