रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या राबर्ट्सगंज सोनभद्र PNP news।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर हालात गरमाते जा रहे हैं। संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी, कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव और निजीकरण की नीतियों के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान का बिगुल फूंक दिया है।यह आंदोलन अब एक व्यापक जनसंग्राम का रूप लेता दिख रहा है, जिसमें कर्मचारियों के साथ आम जनता और किसान भी जुड़ने लगे हैं।संघर्ष समिति के आह्वान पर 16 अप्रैल से केंद्रीय पदाधिकारियों का प्रदेशव्यापी दौरा शुरू होगा, जो 21 मई तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में सभाएं, रैलियां और प्रेस वार्ताएं आयोजित कर बिजली व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य निजीकरण, वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग और पदों में कटौती के दुष्प्रभावों को उजागर करना है।
इसी बीच एक अहम घटनाक्रम ने आंदोलन को और मजबूती दे दी है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के महानिदेशक ने पावर कारपोरेशन प्रबंधन को स्पष्ट शब्दों में अवगत करा दिया है कि आउटसोर्स संविदा कर्मियों को निगम के प्रावधानों से अलग रखने का कोई भी प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है। साथ ही यह भी साफ कर दिया गया है कि निगम से जुड़े नियमों में किसी प्रकार का बदलाव केवल मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही संभव होगा। इसनिर्णय का संघर्ष समिति ने स्वागत करते हुए इसे कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा है कि ऊर्जा निगमों में कार्यरत सभी आउटसोर्स संविदा कर्मियों को सेवा निगम के अंतर्गत लाया जाए और जिन कर्मचारियों को हटाया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों के साथ हो रहा व्यवहार न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि इससे बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
प्रदेशव्यापी इस अभियान की शुरुआत सहारनपुर से होगी और यह यात्रा सोनभद्र के अनपरा तक पहुंचेगी। लगभग 36 दिनों तक चलने वाले इस जन-जागरण अभियान में 60 से अधिक सभाएं, 5 बड़ी रैलियां और प्रत्येक जनपद में प्रेस वार्ताएं प्रस्तावित हैं। इन आयोजनों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं, किसानों और जनता को बिजली क्षेत्र में हो रहे बदलावों के संभावित प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा।संघर्ष समिति ने भरोसा दिलाया है किआंदोलन के दौरान आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। हालांकि, संगठन ने चेतावनी भी दी है कि यदि प्रबंधन का रवैया नहीं बदला तो आने वाले गर्मी के मौसम में बिजली व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
समिति ने पावर कारपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि निकाले गए सभी संविदा कर्मियों को तुरंत बहाल किया जाए, कर्मचारियों पर हो रही उत्पीड़नात्मक कार्रवाई को समाप्त किया जाए और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर समाप्त किए गए पदों को पुनः बहाल किया जाए, ताकि प्रदेश में बिजली आपूर्ति सुचारु बनी रह सके।जन-जागरण अभियान के तहत 16 अप्रैल को सुबह 10 बजे सहारनपुर और शाम 4 बजे शामली में सभाएं आयोजित की जाएंगी। संघर्ष समिति ने प्रदेश के बिजली कर्मियों, किसानों और उपभोक्ताओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है, ताकि बिजली व्यवस्था को जनहित में सुरक्षित रखा जा सके।











