November 2, 2026 9:40 pm

Sonbhadra:सोनभद्र का विजयगढ़ दुर्ग: 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना किला, सालभर पानी से भरे रहते हैं रामसागर-मीरासागर जलाशय

रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या राबर्ट्सगंज सोनभद्र PNP news

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सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की कैमूर पर्वतमाला पर स्थित विजयगढ़ दुर्ग अपनी ऐतिहासिक पहचान, मजबूत बनावट और प्राचीन जल संरक्षण प्रणाली के लिए जाना जाता है।यहां बने रामसागर और मीरासागर जलाशय आज भी सालभर पानी से भरे रहते हैं और लोगों के साथ-साथ इतिहासकारों व शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

 

जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर कैमूर पर्वतमाला की पहाड़ी पर स्थित विजयगढ़ दुर्ग पूर्वांचल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। करीब 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना यह किला अपने मजबूत निर्माण और प्राकृतिक सुरक्षा के कारण प्राचीन समय में सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था।

 

 

शुरुआती दौर में कोल शासकों का प्रभाव था

 

इतिहासकारों के अनुसार इस क्षेत्र पर शुरुआती दौर में कोल शासकों का प्रभाव था। बाद में 11वीं शताब्दी के आसपास यदुवंशी (जादौन) शासक विजयपाल द्वारा दुर्ग के पुनर्निर्माण का उल्लेख मिलता है। हालांकि इस विषय पर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं और इसके प्रमाण सीमित हैं।ऐतिहासिक जलाशय मौजूद हैं

 

दुर्ग परिसर में आज भी प्राचीन मंदिर, शिलालेख, रंगमहल, हजरत मीरान शाह बाबा की मजार तथा रामसागर और मीरासागर जैसे ऐतिहासिक जलाशय मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन जलाशयों में वर्षभर पानी रहने का कारण वर्षा जल का सुनियोजित संग्रह और कैमूर पर्वतमाला की चट्टानों से होने वाला प्राकृतिक भूजल रिसाव है। यही वजह है कि भीषण गर्मी में भी इनमें पानी बना रहता है।

प्रसिद्ध उपन्यास चंद्रकांता में विजयगढ़ का उल्लेख

 

स्थानीय लोग रामसागर को भगवान श्रीराम से जोड़ते हैं, लेकिन इसके समर्थन में कोई प्रमाणित पुरातात्विक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इतिहासकार इसे लोकआस्था का विषय मानते हैं। प्रसिद्ध उपन्यास चंद्रकांता में विजयगढ़ का उल्लेख होने से इस दुर्ग को देशभर में पहचान मिली, हालांकि उपन्यास की कहानी काल्पनिक है।प्राचीन भारतीय जल संरक्षण तकनीक का उदाहरण

 

विशेषज्ञों का मानना है कि विजयगढ़ दुर्ग केवल ऐतिहासिक महत्व का स्मारक ही नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय जल संरक्षण तकनीक, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके संरक्षण और पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर को करीब से जान सकें।

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