नीलेश वर्मा वाराणसी में नेशनल हाईवे पर बेसहारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के लिए एनएचएआई ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाईवे बनाने वाली कंपनियां अब सीएसआर फंड से गोशालाएं बनाएंगी जिनमें पशुओं की देखभाल की जाएगी। प्राधिकरण मुफ्त जमीन देगा और यूपी-हरियाणा सीमा पर एक पायलट प्रोजेक्ट पहले से ही चल रहा है। सड़क सुरक्षा की स्थिति को सुधारने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कंपनियां पशुओं के खान-पान से लेकर उनकी सेहत की चिंता करेंगी। इसके लिए प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों की तरफ से वाराणसी, प्रयागराज, आजमगढ़ व गोरखपुर समेत पांच इकाइयों से जुड़ीं दर्जन भर कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना मांगी गई है।
आश्रय क्षेत्रों का क्षेत्रफल 0.21 से 2.29 हेक्टेयर तक होगा। प्राधिकरण गोशाला के लिए कंपनियों को निश्शुल्क भूखंड उपलब्ध कराएगा। हाईवे के किनारे पर्याप्त खाली जमीन है, इसलिए जमीन मिलने में समस्या नहीं आएगी। देश भर में एनएचएआइ की 1.42 लाख किलोमीटर लंबी सड़कें हैं। इस योजना को बन चुकी सड़कों पर लागू करने का प्रयास है, साथ ही नए प्रोजेक्टों में अनिवार्य रूप से प्रभावी करने की तैयारी है।
नेशनल हाईवे पर बेसहारा गोवंश के कारण लगातार हो रहे हादसों में कमी लाने के उद्देश्य से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की ओर से पहल की गई है। तय हुआ है कि हाईवे का निर्माण कराने वाली कंपनियों को ही सीएसआर (कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) फंड से गोशाला स्थापित करनी होगी।











