दो माह से क्षतिग्रस्त जेपी स्मृति द्वार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!संवाददाता अजीत कुमार सिंह
बैरिया (बलिया)। संपूर्ण क्रांति के अग्रदूत और समाजवाद के पुरोधा लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर सियासत करने वाले जनप्रतिनिधियों के बीच उनकी स्मृति आज उपेक्षा की शिकार है।लोकनायक के पैतृक गांव जयप्रकाशनगर में स्थापित भव्य जेपी स्मृति द्वार बीते दो माह से क्षतिग्रस्त पड़ा है, लेकिन न तो प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम उठाया है और न ही जनप्रतिनिधियों ने इसकी सुध ली है।
ब्लॉक मुरली छपरा अंतर्गत ग्राम पंचायत कोडरहा नौबरार में लाखों रुपये की लागत से निर्मित यह स्मृति द्वार करीब दो माह पूर्व एक अनियंत्रित ट्रैक्टर की टक्कर से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। गेट का एक बड़ा हिस्सा टूट चुका है, जिससे लोकनायक की स्मृति से जुड़ा यह ऐतिहासिक स्थल बदहाली का प्रतीक बन गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब जेपी स्मृति द्वार को नुकसान पहुंचा हो। पहले भी इसे क्षति पहुंच चुकी है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और कार्यदायी संस्था की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। इसके बावजूद न तो निर्माण की जांच कराई गई और न ही किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनावी मौसम में लोकनायक के नाम पर भाषण देने और उनकी विचारधारा का हवाला देने वाले जनप्रतिनिधि आज इस स्मृति स्थल की स्थिति पर मौन साधे हुए हैं। यह चुप्पी लोकनायक की विरासत के प्रति असंवेदनशीलता को उजागर करती है। इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव रमेश कुमार से संपर्क करने का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। हालांकि, एक माह पूर्व उन्होंने स्थानीय पत्रकार से बातचीत में मरम्मत की सूचना विभाग को भेजे जाने और शीघ्र कार्य कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं दिख रही है। ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। लोगों ने मांग की है कि जेपी स्मृति द्वार की तत्काल मरम्मत कराई जाए, निर्माण की गुणवत्ता की जांच हो, दोषियों की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।











