संवाददाता: कमलेश तिवारी | सोनभद्र
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सोनभद्र जनपद में प्रधानमंत्री आवास योजना (नगर पालिका) को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि पात्र लाभार्थियों से 20 से 25 हजार रुपये की घूस लेकर ही आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं, जबकि रिश्वत न देने वाले गरीब और लाचार परिवार आज भी कच्चे और जर्जर घरों में रहने को मजबूर हैं।
सोनभद्र के निवासी लक्ष्मण कुमार नगर पालिका गुवाश रहने वाले व्यक्ति ने बताया कि वे सभी मानकों के अनुसार पीएम आवास योजना के पात्र हैं, इसके बावजूद उन्हें आज तक आवास का लाभ नहीं मिला। पीड़ित का आरोप है कि ग्राम सचिव और लेखपाल की मिलीभगत से आवास स्वीकृति का पूरा खेल चल रहा है।
पीड़ित परिवार के अनुसार, जब उनसे आवास पास कराने के बदले रुपये की मांग की गई और उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो उनका नाम सूची से बाहर कर दिया गया। 50 वर्षीय बुजुर्ग पीड़ित ने बताया कि उनके परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है और हर साल बारिश, तूफान और ठंड में उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
पीड़ित ने मीडिया से बातचीत में कहा,
“अगर हमारे पास पैसे होते तो हम भी घूस दे देते। गरीब आदमी की सुनने वाला कोई नहीं है। अधिकारी करोड़ों की बात करते हैं, हमारी फरियाद कौन सुनेगा?”
मामले को लेकर जब सोनभद्र के जिलाधिकारी श्री बद्रीनाथ सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
“यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि सवाल यह है कि जब तक जमीनी स्तर पर पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक क्या वाकई पात्र गरीबों को उनका हक मिल पाएगा? यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है











