बलिया (बैरिया)।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बैरिया क्षेत्र के ग्राम पोस्ट श्रीनगर दलछपरा में स्मार्ट/डिजिटल बिजली मीटर लगाने के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मीटर लगाने के दौरान कुछ कर्मचारी घर-घर जाकर ₹100, ₹200 से लेकर ₹300 तक की जबरन वसूली कर रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अब तक इस तरह से करीब दो लाख रुपये से अधिक की अवैध वसूली की जा चुकी है।
ग्रामीणों के अनुसार नानजी यादव, रामजी यादव सहित कई उपभोक्ताओं के घरों पर मीटर लगाने के नाम पर पैसे लिए गए। कई पीड़ितों ने ऑनलाइन भुगतान के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखे हैं, जिन्हें साक्ष्य के रूप में सोशल मीडिया और अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
बिजली विभाग के अनुसार स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य एक प्राइवेट कंपनी को टेंडर प्रक्रिया के तहत सौंपा गया है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मीटर लगाने आए लोगों के पास न तो कोई पहचान पत्र (आई-कार्ड) था और न ही कोई अधिकृत प्रमाण पत्र, जिससे गांव में भ्रम और भय का माहौल बन गया। इसी का फायदा उठाकर अवैध वसूली की जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पैसे देने से इनकार करने पर मारपीट की गई। वहीं जब इस अवैध वसूली का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला गया तो संबंधित व्यक्ति को जान से मारने की धमकी और गाली-गलौज किए जाने का भी आरोप है।
सोशल मीडिया पर ‘विराट सिंह कोहली’ नामक फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्मार्ट मीटर के नाम पर पैसे लेते हुए लोग स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित व्यक्ति को धमकाए जाने की भी शिकायत सामने आई है।
इस मामले में विभागीय उच्च अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाना है। यदि कोई व्यक्ति पैसे की मांग करता है तो उससे अधिकृत पहचान पत्र और रसीद मांगना चाहिए तथा ऐसी स्थिति में तुरंत विभागीय अधिकारियों या पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इधर इस संबंध में पत्रकार द्वारा जब मूलचंद शर्मा एक्शियन (मोबाइल नंबर: 8004932171) से बात की गई तो उन्होंने पहले यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि “ग्रामीण पैसे क्यों देते हैं।” जब उनसे कर्मचारियों द्वारा झगड़ा और दुर्व्यवहार किए जाने का सवाल किया गया तो उन्होंने पत्रकार के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इससे ग्रामीणों में यह संदेह और गहरा गया है कि कहीं अवैध वसूली उनके संरक्षण या इशारे पर तो नहीं हो रही है।











