संवाददाता अजीत कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बैरिया (बलिया)। सरयू नदी की कटान से उजड़े परिवारों को बसाने के नाम पर तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर कटान पीड़ितों को पट्टा देकर बसाया गया, वहीं दूसरी ओर उसी भूमि पर किसान का नाम दर्ज कराने का आदेश पारित कर पीड़ितों को फिर से बेघर होने की स्थिति में डाल दिया गया है। यह मामला मुरली छपरा ब्लॉक के इब्राहिमाबाद नौबरार अठगावां, छक्कू टोला के उन नौ कटान पीड़ित परिवारों से जुड़ा है, जिनके घर 10 अगस्त 2014 को सरयू नदी की कटान में बह गए थे। लंबे समय तक ये परिवार बीएसटी बांध पर रहने को मजबूर रहे। कई आंदोलनों, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम के बाद तत्कालीन एसडीएम राधेश्याम पाठक व तहसीलदार गुलाब चंद्रा द्वारा 22 अगस्त 2017 को चांददीयर पंचायत के बकुल्हा रेलवे स्टेशन के पास नई परती भूमि पर नौ कटान पीड़ितों को पट्टा दिया गया। इसके बाद 12 सितंबर 2017 को उन्हें विधिवत कब्जा भी दिलाया गया। पट्टा मिलने के बाद पीड़ित परिवारों ने वहीं मड़हा डालकर गुजर-बसर शुरू की। इन कटान पीड़ितों में अनिल गुप्ता, दशरथ साह, विनोद साह, अतवारु साह, सुनील साह, संजय साह, राधेश्याम साह, अनिल साह और प्यारचंद साह शामिल हैं। लेकिन दुर्भाग्य ने एक बार फिर दस्तक दी। 11 मई 2024 को अज्ञात कारणों से लगी आग में सभी मड़हे जलकर राख हो गए। इसके बाद सभी पीड़ित अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हो गए। इसी बीच 15 सितंबर 2025 को सभी कटान पीड़ितों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ और प्रति परिवार 40-40 हजार रुपये की पहली किस्त उनके खातों में भेजी गई। जैसे ही पीड़ित अपने पट्टे की भूमि पर पक्का मकान बनवाने लगे, तभी कथित खातेदार किसान मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रुकवा दिया। किसानों का दावा है कि जिस भूमि पर पट्टा दिया गया, वह उनकी भूमिधरी जमीन है, जिसे त्रुटिवश नई परती दर्ज कर दिया गया था। उनका कहना है कि इस संबंध में मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा और 16 मार्च 2019 को तत्कालीन उपजिलाधिकारी द्वारा नई परती हटाकर भूमि को भूमिधरी खाते में दर्ज करने का आदेश पारित किया जा चुका है।
*पीड़ितों ने SDM से लगाई गुहार*
कटान पीड़ितों ने इस पूरे मामले को लेकर 15 दिसंबर को उपजिलाधिकारी बैरिया को लिखित शिकायत सौंपी है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि एक बार फिर वे न घर के रहे, न घाट के।
*किसान पक्ष*
जयप्रकाश नगर, टोला नेका राय निवासी किसान सुरेंद्र प्रताप सिंह, हरेंद्र और संतोष सिंह (पुत्र स्व. जगनारायण सिंह) ने बताया कि पट्टा आवंटन के समय ही उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि उन्हें कटान पीड़ितों से कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है, लेकिन भूमि विवाद का समाधान प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए और पीड़ितों को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
*प्रशासन का बयान*
आलोक प्रताप सिंह, उपजिलाधिकारी बैरिया ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। सभी बिंदुओं की जांच कराई जा रही है और जांचोपरांत न्यायोचित कार्रवाई की जाएगी।
*राजनीतिक प्रतिक्रिया*
इंटक नेता विनोद सिंह ने कहा कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था का स्पष्ट उदाहरण है। एक ही अधिकारी द्वारा पहले पट्टा और कब्जा दिलाना और फिर उसी भूमि पर किसान का नाम दर्ज कराने का आदेश देना कटान पीड़ितों के साथ अन्याय है।











