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रेवाड़ी, 8 दिसंबर ब्यूरो चीफ दीपक तिवारी
रेवाड़ी निवासी रमन कुमार द्वारा रिलायंस स्मार्ट रिटेल BMG मॉल और parle-G बिस्किट कंपनी के खिलाफ दायर वाद पर सुनवाई करते हुए कंज्यूमर कोर्ट ने parle -G बिस्किट कंपनी को दोषी पाया और parle-G कंपनी पर 2500 रूपये का जुर्माना लगाया है। साथ में लिटिगेशन चार्ज अलग से देना होगा और शिकायत निपटारे तक जुर्माने की राशि पर 9 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
दरअसल, रेवाड़ी निवासी रमन कुमार ने गत वर्ष 12 मार्च को रिलायंस स्मार्ट रिटेल BMG मॉल से parle -G बिस्किट के साथ अन्य जरूरी सामान खरीद किया था। खरीदे हुए बिस्किट को घर लेकर जाने बाद चाय के साथ खाने के लिय खोला गया तो देखा कि एक बिस्कुट में मक्खी थी। गहराई से देखने पर स्पष्ट लग रहा था कि बिस्किट को बनाते समय मैट्रियल में ही मक्खी आ गई जो बिस्किट बनाने की मशीन की डाई के साथ बिस्किट में सेट हो गई, जोकि स्पष्ट दिखाई दे रही थी। जबकि पारले जी बिस्किट कंपनी दावा करती है कि उसके प्रोडक्ट साफ सुथरे तरीके से बनाए जाते है। कंपनी में बिस्किट बनाने का स्थान पूरा हाईजनिक है और fssai से अप्रूव्ड भी होता है।
खरीदे गए बिस्कुल को लेकर 14 मार्च को कंज्यूमर कोर्ट रेवाड़ी में रिलायंस स्मार्ट रिटेल BMG मॉल और parle-G बिस्किट कंपनी के खिलाफ वाद दायर किया गया। तीनों पक्षों ने अपनी अपनी बात रखी। रिलायंस स्मार्ट रिटेल BMG मॉल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इसमें हमारा कोई दोष नहीं है, क्योंकि पारले कंपनी से सील पैक बिस्कुट आते हैं, जो सील पैक ही बिक्री किए गए। पारले बिस्कुट कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बिस्किट में लगी मक्खी बिस्किट खोलने के उपरांत बाद में चिपकाई हो सकती है। इसलिए बिस्किट में मक्खी होने का दावा हमारी कम्पनी की छवि को कमजोर करने के मकसद से लाया गया है, जोकि पूरी तरह निराधार है।
शिकायतकर्ता के अधिवक्ता कैलाश चंद ने शिकायतकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए अपनी जिरह में स्पष्ट किया कि जो बिस्किट पेश किया है, उसमें स्पष्ट दिखाई दे रही है कि बिस्किट बनाते समय मशीन की डाई के साथ बिस्कुट पर आई है, जो बाद में इस प्रकार से चिपकाई ही नहीं जा सकती, क्योंकि डाई के साथ चिपकने और बाद में चिपकाने में अंतर स्पष्ट नजर आता है।
सभी पक्षों की जिरह होने के बाद कंज्यूमर कोर्ट ने parle -G बिस्किट कंपनी को दोषी पाया, जिसके बाद parle-G कंपनी पर 2500 रूपये का जुर्माना लगाया गया। साथ में लिटिगेशन चार्ज अलग से देना होगा और शिकायत निपटारे तक जुर्माने की राशि पर 9 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।











