November 2, 2026 7:55 pm

बारिश में डूबता दिखा शिक्षा का भविष्य: विद्यालय में अध्यापक नदारद, बच्चों को समय से पहले छुट्टी, बैरिया ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय हनुमानगंज नई बस्ती में लापरवाही का मामला, ग्रामीणों में भारी नाराजगी

 

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जिला ब्यूरो(पी.एन.पी. समाचार ) नीलेश वर्मा

बैरिया (बलिया)। जहां एक ओर सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बैरिया ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय हनुमानगंज नई बस्ती में सोमवार को हुई बारिश शिक्षकों के लिए तो आनंद का बहाना बन गई, लेकिन मासूम बच्चों के लिए यह दिन ठगी और उपेक्षा का प्रतीक बन गया।

विद्यालय के बच्चों से मिली जानकारी के अनुसार दिनांक 28 जुलाई 2025 दिन सोमवार को केवल 14 बच्चे उपस्थित थे। लेकिन बच्चों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानाध्यापक को छोड़कर बाकी सभी शिक्षक विद्यालय छोड़कर चले गए, और दोपहर 1 बजे ही बच्चों की छुट्टी कर दी गई। जबकि नियमानुसार विद्यालय का समय 2 बजे तक निर्धारित है।

“शिक्षक ही जब जिम्मेदार नहीं, तो बच्चों का भविष्य कौन संभालेगा?”
यह सवाल सिर्फ ग्रामीणों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। क्षेत्रीय लोगों ने इस लापरवाही पर गहरा रोष व्यक्त किया है। गांव के ही कुछ स्थानीय लोगों का कहना हैं कि सरकारी स्कूलों में अगर पढ़ाई यूं ही मजाक बनकर रह गई है, तो फिर गरीब के बच्चों का हक कौन दिलाएगा। इन अध्यापको के बच्चे तों प्राइवेट विद्यालय में पढ़कर अध्यापक बनेगे और फिर हमारे बच्चों का इसी तरह जिंदगी बर्बाद करेंगे। वहीं विशेष सूत्रों से मिली जानकारी ने तों पुरे समाज में हड़कंप मचा दिया, हाजिरी लगी रजिस्टर पऱ मगर विद्यालय से अध्यापक ही गायब थे। हालांकि इसकि पुष्टि यह शोशल मिडिया प्लेटफार्म नही करता है।

लोगों ने खंड शिक्षा अधिकारी पंकज मिश्रा पर भी सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अध्यापकों की निगरानी और अनुशासन बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन जब इस तरह खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जाएं और कोई कार्रवाई न हो, तो यह चुप्पी खुद सवाल बन जाती है।
अब देखना ये है कि क्या खण्ड शिक्षा अधिकारी पंकज मिश्रा अपना एक अधिकारी वाला ड्यूटी निभाते है जिनके लिए सरकार से उनको रखा है या यूँ ही पहले कि तरह लापरवाह अध्यापको के साथ निभाएंगे।

स्थानीय लोगों की मांग: दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई
गांववासियों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस मामले की जांच कर जिम्मेदार शिक्षकों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
“हम बच्चों को किताबों का सपना देकर स्कूल भेजते हैं, लेकिन वहां उन्हें शिक्षक नहीं मिलते, समय से पहले छुट्टी कर दी जाती है। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?

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