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धारूहेड़ा-18जुलाई रिपोर्टर महेश कुमार
कुछ महीने पहले ही धारूहेड़ा के हुडा सेक्टरों की चारदीवारी का काम नगरपालिका धारूहेड़ा द्वारा शुरू किया गया था। इसमें भारी मात्रा में कुशल और अकुशल कर्मचारियों का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही, ईंटों, रेत, सीमेंट, लोहे के एंगल, तार की जाली, पानी आदि का भी इस्तेमाल किया गया था। इस काम में भारी मात्रा में धन खर्च हुआ।
अब कई जगहों पर सेक्टरों के अंदर हरित पट्टी की दीवारें, लोहे के फ्रेम वाली तार की जाली मजदूरों द्वारा तोड़ दी गई हैं और इस्तेमाल की गई सामग्री खराब हो गई है। इतना ही नहीं, श्रम लागत भी बढ़ गई है।
यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि हरित पट्टी के अंदर वर्षा जल संचयन गड्ढों का काम चल रहा है।
सोचने वाली बात यह है कि यह एक खराब प्रबंधन योजना थी। लागत बचाने के लिए यह काम चारदीवारी बनाने से पहले ही कर लिया जाना चाहिए था। दूसरी बात, अगर ऐसा नहीं किया गया, तो जिस हिस्से में बोरिंग के लिए ट्रैक्टर की एंट्री ज़रूरी थी, उसे नहीं बनाया जाना चाहिए था। इस योजना में लागत तो बढ़ी ही, पैसा भी बर्बाद हुआ, सामग्री भी बर्बाद हुई। अब इसे फिर से बनाया जाएगा और फिर से पैसा खर्च किया जाएगा।
यह सब अधिकारियों की खराब योजना के कारण हो रहा है।
हैरानी की बात यह है कि ग्रीन बेल्ट बनाने के बजाय, इन्हें सेक्टर में मौजूद कई पार्कों के अंदर बनाया जाना चाहिए था, ताकि कम से कम हुडा सेक्टरों का पानी वर्षा जल संचयन गड्ढों में जमा हो सके।
और भी महत्वपूर्ण बात यह है कि जब भविष्य में सड़कें चौड़ी होंगी, तो इन वर्षा जल संचयन गड्ढों का रखरखाव कैसे होगा।











