रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ योगेश यादव | PNP News Maharashtra
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मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के कामकाजी ज्ञान को लेकर शुरू हुआ अभियान अब सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। 15 अगस्त को मराठी सीखने के लिए दी गई 105 दिनों की समय-सीमा पूरी होने के बाद परिवहन विभाग और RTO ने जांच अभियान तेज कर दिया है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक ऑटो-रिक्शा को ट्रेन में चढ़ाते हुए दिखाई दिया जा रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि मराठी भाषा के नियमों से परेशान होकर ऑटो चालक मुंबई छोड़कर अपने गृह राज्य लौट रहे हैं।
हालांकि, वायरल वीडियो को मुंबई से ऑटो चालकों के बड़े पैमाने पर पलायन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस तरह के सामूहिक पलायन की प्रशासनिक स्तर पर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।
ट्रेन में ऑटो चढ़ाने वाले वीडियो ने खड़ा किया सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक ऑटो-रिक्शा को ट्रेन के सामान/लगेज हिस्से में ले जाते हुए देखा जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद इसे मुंबई से जोड़ते हुए अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि मराठी भाषा के नियमों के कारण गैर-मराठी ऑटो चालक मुंबई छोड़कर अपने राज्य वापस जा रहे हैं।
वीडियो ने सोशल मीडिया पर सवाल जरूर खड़ा कर दिया है, लेकिन केवल वीडियो के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि ऑटो चालक मुंबई का ही है, वीडियो कब और कहां बनाया गया है या उसके मुंबई छोड़ने की वास्तविक वजह क्या है।
यही वजह है कि “मुंबई से रिक्शावालों का सामूहिक पलायन” जैसी बात को फिलहाल प्रमाणित खबर के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
105 दिन का समय पूरा, अब RTO की निगरानी
महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी का बुनियादी और व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने के लिए 1 मई से 15 अगस्त तक 105 दिनों का समय दिया था। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पहले ही चेतावनी दी थी कि निर्धारित अवधि के बाद मराठी का कामकाजी ज्ञान नहीं रखने वाले चालकों पर कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार की ओर से चालकों के लिए विशेष प्रशिक्षण अभियान भी चलाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 1.25 लाख ऑटो-टैक्सी चालकों ने प्रशिक्षण लेकर परीक्षा पास की और प्रमाणपत्र प्राप्त किए।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच रोजमर्रा के संवाद को आसान बनाना है। वहीं, कुछ चालक संगठनों ने प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध समय और केंद्रों की संख्या को लेकर अतिरिक्त समय की मांग भी की थी।
मुंबई में RTO की मौखिक जांच
अब नियमों के पालन की जांच जमीनी स्तर पर शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई महानगर क्षेत्र में RTO अधिकारियों ने एक दिन में 3,995 ऑटो-टैक्सी चालकों की जांच की और 604 चालकों को नोटिस जारी किए। जांच के दौरान चालकों से यात्रियों से रोज होने वाली बातचीत से जुड़े सवाल पूछे गए—जैसे यात्री को कहां जाना है, किराया कितना होगा, रास्ता क्या है, यात्रा में कितना समय लगेगा और UPI से भुगतान जैसी सामान्य बातचीत।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल कार्रवाई का केंद्र चालकों की व्यावहारिक मराठी समझ है, न कि केवल प्रमाणपत्र दिखाना।
नियम नहीं मानने पर क्या हो सकता है?
परिवहन विभाग की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। जिन चालकों को जांच में मराठी का पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान नहीं पाया जाता, उनके खिलाफ नोटिस और आगे की कार्रवाई का प्रावधान है। लगातार नियमों का पालन नहीं करने पर लाइसेंस के निलंबन या रद्द किए जाने तक की कार्रवाई हो सकती है।
वहीं, अधिकारियों की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि चालकों को सुधार का अवसर दिया जा रहा है। यानी हर ऐसे चालक का लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
चालकों के बीच चिंता, यूनियन ने मांगा अतिरिक्त समय
मराठी प्रशिक्षण की समय-सीमा को लेकर ऑटो-टैक्सी यूनियन की ओर से भी सवाल उठाए गए थे। मुंबई ऑटोरिक्शा-टैक्सीमेन्स यूनियन ने प्रशिक्षण की समय-सीमा बढ़ाने और ज्यादा प्रशिक्षण केंद्र उपलब्ध कराने की मांग की थी।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि चालकों को पर्याप्त समय दिया गया और अब नियमों के पालन की जांच आवश्यक है।
क्या वाकई मुंबई छोड़ रहे हैं ऑटो चालक?
यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है।
ट्रेन में ऑटो चढ़ाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और इसे मुंबई छोड़ने वाले चालकों से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक आंकड़ा या प्रशासनिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे यह साबित हो कि बड़ी संख्या में ऑटो-रिक्शा चालक मराठी भाषा के नियम के कारण मुंबई छोड़ रहे हैं।
किसी एक चालक का ऑटो ट्रेन से ले जाना कई कारणों से हो सकता है। इसलिए वीडियो के आधार पर उसके मुंबई छोड़ने की वजह तय करना उचित नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर वायरल दावों से सावधान रहने की जरूरत
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरल वीडियो और आधिकारिक जानकारी को अलग-अलग देखा जाए। वीडियो वास्तविक हो सकता है, लेकिन उसके साथ जो दावा लिखा गया है, वह जरूरी नहीं कि सही हो।
जब तक संबंधित चालक, रेलवे, RTO या प्रशासन की ओर से वीडियो की जगह, तारीख और घटना की पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे “मुंबई से रिक्शावालों का पलायन” कहना जल्दबाजी होगी।
मराठी अभियान का अगला चरण शुरू
105 दिनों के प्रशिक्षण अभियान के बाद अब महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर सरकारी अभियान का दूसरा चरण शुरू हो गया है। एक तरफ बड़ी संख्या में चालक प्रशिक्षण लेकर परीक्षा पास कर चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ जिन चालकों को अभी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं है, उनकी RTO जांच की जा रही है।
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कितने चालक निर्धारित समय में अपनी भाषा संबंधी कमी पूरी करते हैं और कितने चालकों पर आगे कार्रवाई होती है।











