November 2, 2026 8:53 pm

बलिया समाचार: पहली बारिश ने खोल दी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्माण की पोल, एनएच-31 के नीचे बनी 12 फीट गहरी सुरंग; बाल-बाल बची जानें

संपादक: पीएनपी न्यूज़ | बलिया

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उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाले अत्यंत व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य की कथित लापरवाही पहली ही बारिश में सामने आ गई। बैरिया-मांझी मार्ग पर मठ योगेंद्रगिरी के पास सड़क के नीचे की मिट्टी बह जाने से लगभग 10 से 12 फीट गहरी सुरंग बन गई। यदि समय रहते लोगों की नजर इस पर नहीं पड़ती, तो किसी भी क्षण बड़ा सड़क हादसा दर्जनों लोगों की जान ले सकता था।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिहार के मांझी से बैरिया आ रही एक चारपहिया गाड़ी जैसे ही इस स्थान पर पहुंची, सड़क अचानक धंसने लगी। चालक की सूझबूझ और सतर्कता से वाहन किसी तरह निकल गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान यहां की पुरानी पुलिया को बंद कर दिया गया, लेकिन उसके स्थान पर तकनीकी मानकों के अनुरूप भराई और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई। पहली ही बारिश में पानी ने अंदर से मिट्टी बहा दी और सड़क पूरी तरह खोखली होकर धंस गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल प्राकृतिक कारण नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही का परिणाम है।

 

भाजपा नेता सुनील कुमार सिंह ने कहा कि पहले पुलिया से बरसाती पानी आसानी से निकल जाता था, लेकिन उसे बंद कर देने के कारण यह स्थिति पैदा हुई। मठ योगेंद्रगिरी निवासी गोलू यादव ने बताया कि ग्रामीण पहले से ही इस खतरे की आशंका जता रहे थे। वहीं प्रीतम छपरा निवासी **राजेश सिंह** का कहना है कि कई बार अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई।

 

सबसे चिंताजनक बात यह रही कि प्रशासन या कार्यदायी संस्था की ओर से तत्काल कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। हादसे की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने स्वयं बांस की बल्लियां गाड़कर और लाल कपड़ा बांधकर अस्थायी चेतावनी की व्यवस्था की, ताकि रात में गुजरने वाले वाहन चालक सतर्क रह सकें।

 

बैरिया के उपजिलाधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने कहा कि सूचना प्राप्त हो गई है और स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।

अब बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में यदि पहली ही बारिश में सड़क के नीचे सुरंग बनने लगे, तो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने सड़क की तत्काल मरम्मत, निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच तथा दोषी कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अगला हादसा जानलेवा साबित हो सकता है।

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