गुरुग्राम- 30 दिसंबर ब्यूरो चीफ दीपक तिवारी
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हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान तेज़ हो गया है। हरियाणा सरकार में मंत्री एवं बादशाहपुर से विधायक राव नरवीर सिंह ने केंद्रीय मंत्री एवं गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र से सांसद राव इंद्रजीत सिंह पर खुला और तीखा हमला बोलते हुए भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राव नरवीर सिंह के बयान न केवल व्यक्तिगत आरोपों से भरे रहे, बल्कि उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारी और जनप्रतिनिधियों के दायित्वों को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां कीं।
“खिलाफत करता तो एमपी नहीं बनता” — बयान के सियासी मायने
राव नरवीर सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा, “अगर मैं खिलाफत करता तो आज एमपी नहीं बनता।” यह बयान सीधे तौर पर राव इंद्रजीत सिंह की कार्यशैली और कथित राजनीतिक दबदबे की ओर इशारा करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब-जब राव इंद्रजीत सिंह को किसी काम के लिए ज़रूरत पड़ती है, वे फोन करते हैं, लेकिन जब क्षेत्र के लोगों या कार्यकर्ताओं को मदद की आवश्यकता होती है, तब कोई सहायता नहीं मिलती।
यह बयान हरियाणा की राजनीति में केवल एक व्यक्तिगत आरोप नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा के भीतर असंतोष और गुटबाजी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
मदद के सवाल पर गंभीर आरोप
राव नरवीर सिंह ने कहा कि क्षेत्र के आम लोग और पार्टी कार्यकर्ता सांसद से संपर्क करते हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनप्रतिनिधि होने का मतलब सिर्फ पद और प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में साथ खड़ा होना भी है।
उनके मुताबिक, “फोन सिर्फ अपने काम के लिए होते हैं, जनता के काम के लिए नहीं।भाजपा संगठन में बढ़ी चिंता इस बयानबाज़ी के बाद भाजपा संगठन में खलबली मचना स्वाभाविक है। चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण हरियाणा में इस तरह के सार्वजनिक बयान पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते पार्टी नेतृत्व ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह विवाद आने वाले समय में संगठनात्मक कमजोरी का कारण बन सकता है।
अहीरवाल क्षेत्र की राजनीति पर असर
राव इंद्रजीत सिंह और राव नरवीर सिंह दोनों ही अहीरवाल क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली चेहरे माने जाते हैं। ऐसे में उनके बीच खुला टकराव क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यह टकराव न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई है, बल्कि क्षेत्रीय नेतृत्व और प्रभाव की प्रतिस्पर्धा भी है।
चुप्पी या जवाब-
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राव इंद्रजीत सिंह इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वे चुप्पी साधेंगे या सार्वजनिक रूप से जवाब देंगे।वहीं पार्टी नेतृत्व के सामने भी यह चुनौती है कि वह इस विवाद को कैसे संभालता है—क्या इसे आपसी बातचीत से सुलझाया जाएगा या अनुशासनात्मक कार्रवाई की नौबत आएगी। राव नरवीर सिंह का यह हमला केवल एक बयान नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर चल रही असंतोष की धारा का संकेत है। यदि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इसका असर न केवल पार्टी की एकजुटता पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।
हरियाणा की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज़ होने के संकेत दे रहा है—अब देखना यह है कि भाजपा नेतृत्व इसे किस दिशा में मोड़ता है।











