November 2, 2026 8:11 pm

मेरठ शहर क़ाज़ी के पद को लेकर कुछ राजनीतिक षड्यंत्रकारियों द्वारा खेल बनाकर रख दिया–गादरे

*रितिक कुमार वरिष्ठ पत्रकार जिला ब्यूरो चीफ

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मेरठ:-क्रांतिकारी मेरठ शहर क़ाज़ी मरहूम डा जैनुलसाजेदीन साहब के इंतेकाल से एक ओर शहर गमगीन माहौल की कशमकश में हैं दूसरी ओर शहर क़ाज़ी के पद को लेकर शहर में अलग-अलग स्थानों पर चर्चाएं ही नहीं दो गुटों में बंटे हुए हैं।
राजुद्दीन गादरे सोशल एंड पॉलीटिकल एक्टिविस्ट पूर्व प्रत्याशी मेरठ दक्षिण विधानसभा मेरठ ने शहर क़ाज़ी दीन ए इस्लाम मज़हब के सरिया कानून के जिला जज कह सकते हैं? एक और भारत देश में लगातार अच्छे-अच्छे आमार अखलाक समता समानता न्याय बंधुता और स्वतंत्रता पर आधारित दीन‌ ऐ इस्लाम मज़हब के पीछे शासन प्रशासन के कुछ षड्यंत्रकारियों द्वारा और उपद्रवियों ने देश और समाज की चिंता न होकर ग्रह युद्ध की ओर धकेलने लगी है? अफसोस होता है! देश आजाद हुए करीब 78 साल बाद तक 99.5% भारतीय मुस्लिम समुदाय के मूल निवासी समाज को न समाज में न देश में हक अधिकार सामाजिक न्याय मिल रहा है। और संविधान पूर्णतया लागू भी नहीं हो पा रहा है। पहले राजा के घर से राजा पैदा होता था आज भी जो कामयाब पसमांदा मुस्लिम समुदाय है उनमें काबिलियत होते हुए भी कुछ षड्यंत्रकारियों द्वारा धार्मिक मान्यता में भी गंदी राजनीति रंचने वाले मुफाद परस्त लोगों के कारन सुधार नहीं हो पा रहा है।
नबी ए पाक मुहम्मद साहब ने सबसे पहले एक हब्शी गुलाम को इज्जत हक अधिकार राजुद्दीन गादरे पूर्व प्रत्याशी मेरठ दक्षिण विधानसभा मेरठ ने आगे कहा कि सामाजिक न्याय से साथ सहयोग देकर अच्छे आमार अखलाक की नींव रखी थी? शहर क़ाज़ी के पद पर जो काबिलियत और कुर्बानी देने वाले उलेमा ए दीन ए इस्लाम मज़हब पर अच्छे व्यक्ति हो उनको एक राय होकर जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। मुस्लिम समुदाय में भी अलग अलग बिरादरी में उलेमा मौजूद हैं? अब सवाल उठता है प्रत्येक जाति पाँति से हर एक समाज अपनी जाति का शहर क़ाज़ी बनाना चाहते हैँ। अससोस! एक और मुकम्मल ईमान और मुकम्मल दीन के लोग शहर क़ाज़ी जैसे पद में शासन सत्ता से सहयोग की गुजारिश कर रहे हैं मनुवादी यानी ऊँचनीच धार्मिक उन्माद फैलाने वाले लोगों से इंसाफ हक़ अधिकार की उम्मीद लगाए बैठे हैं ऐसे लोग तो खुद लडाई झगडे चाहेंगे? खुद उलेमाओं को या दारुल उलूम देवबंद से इंसाफ हक़ अधिकार सामाजिक न्याय की आपसी सहमति से हल किया जाना चाहिए?
शहर क़ाज़ी ऐसे काबिल उलेमा को बनाया जाए जो इँसानियत से इंसाफ हक़ अधिकार सामाजिक न्याय दीन ए इस्लाम मज़हब से भाईचारा कायम करने में कुर्बानी दें सके शैक्षणिक वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से देश और समाज में शासन सत्ता प्रसाशन में वजूद कायम कर सके। इस मामले में दारुल उलूम देवबंद से इंसाफ की उम्मीदें हैं। जल्द से जल्द कार्रवाई की जानी चाहिए। अमन कायम रखें राजनीतिक षड्यंत्रकारियों को दूर रखा जाए कोई पार्टी बाजी ऐसे मामलों में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर जाती दुश्मनी न बनाई जाए। और लोगों ने कोई कमी नही कर रखी जो खुद के पैरों पर खुद कुल्हाड़ा चला रहे हैं? किसी ने कहा था कि बटोगे तो कटोगे? एक खुदा को मानने वाले भी बंटेँगे लड़ेंगे तो आने वाली नस्लें बरबाद नहीं तो क्या आबाद होंगी!

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