रिपोर्टर, ब्यूरो चीफ योगेश यादव पीएनपी न्यूज चैनल महाराष्ट्र
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मुंबई और महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा व टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के नियम को लेकर विवाद अब तेज हो गया है। सरकार की कार्रवाई के विरोध में गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा चालकों ने सोमवार से तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। चालकों का आरोप है कि भाषा के नियम को लागू करने के तरीके से उन पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
कई उम्रदराज चालकों का कहना है कि उन्होंने ज्यादा पढ़ाई नहीं की है और वर्षों से ऑटो चलाकर परिवार का खर्च उठा रहे हैं। उनका सवाल है कि 55 से 60 वर्ष की उम्र में रोजी-रोटी की जिम्मेदारी संभालने के साथ नई भाषा सीखना उनके लिए कितना आसान होगा।
नोटिस के बाद मराठी सीखने का मौका
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 19 अगस्त को कहा था कि जिन चालकों को मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं है, उन्हें पहले नोटिस दिया जाएगा और भाषा सीखने के लिए समय दिया जाएगा। इसके बाद भी नियम का पालन नहीं करने पर लाइसेंस और बैज के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
20 अगस्त से परिवहन विभाग ने मुंबई समेत महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में जांच अभियान शुरू किया है। अधिकारियों की ओर से चालकों की मराठी में बातचीत करने की क्षमता जांची जा रही है।
चालकों की मांग- जुर्माना नहीं, सीखने के लिए पर्याप्त समय मिले
प्रदर्शन कर रहे चालकों का कहना है कि वे मराठी सीखने के खिलाफ नहीं हैं। कई चालक रोजमर्रा की जरूरत के मुताबिक मराठी बोलने की कोशिश भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को पहले पर्याप्त प्रशिक्षण और समय देना चाहिए, उसके बाद ही किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
चालकों का सवाल है कि अगर किसी पर 15 से 20 हजार रुपये तक का आर्थिक बोझ पड़ता है तो रोज कमाकर परिवार चलाने वाला ड्राइवर इतनी बड़ी रकम कैसे जमा करेगा। इसी वजह से यूनियन और चालकों ने तीन दिन तक हड़ताल का फैसला लिया है।
अब तक हजारों चालकों की जांच
परिवहन विभाग के अनुसार, 20 अगस्त से शुरू हुए अभियान में मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में करीब 13 हजार चालकों की जांच की जा चुकी है। इस दौरान मराठी भाषा की आवश्यक समझ नहीं होने वाले करीब 2,500 चालकों को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
अधिकारियों के मुताबिक यह अभियान 30 सितंबर तक जारी रहने वाला है। भाषा की जांच में आवश्यक स्तर पूरा नहीं करने वाले चालकों को मराठी सीखने के लिए समय दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण को लेकर भी उठे सवाल
कुछ चालकों का दावा है कि मराठी सीखने के लिए उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षण सत्र पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि केवल कुछ कक्षाओं में किसी व्यक्ति के लिए कामचलाऊ भाषा सीखना आसान नहीं है।
एक चालक ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसे वाहन की EMI समेत घर का खर्च भी चलाना है। ऐसे में अगर काम प्रभावित होता है या आर्थिक दंड लगाया जाता है तो परिवार पर सीधा असर पड़ेगा।
‘वर्किंग नॉलेज’ कितनी मराठी को माना जाएगा?
सेवा सारथी ऑटो-रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता डीएम गोसावी ने नियम की स्पष्टता पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सरकार ने ड्राइवरों के लिए मराठी का ‘वर्किंग नॉलेज’ जरूरी बताया है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस स्तर के लिए वास्तव में कितनी भाषा समझना और बोलना आवश्यक है।
यूनियन का दावा है कि नियम अगर स्पष्ट नहीं रहे तो जांच के दौरान मनमानी की शिकायतें बढ़ सकती हैं और चालकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
दूसरे राज्यों से आए चालकों में सबसे ज्यादा चिंता
मुंबई और एमएमआर में बड़ी संख्या में ऐसे ऑटो-टैक्सी चालक काम करते हैं जो उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से महाराष्ट्र आए हैं। इनमें कुछ चालक मराठी समझ लेते हैं, जबकि कई केवल सीमित शब्दों या रोजमर्रा की बातचीत तक ही भाषा जानते हैं।
ऐसे चालकों को अब लाइसेंस, बैज और रोजगार पर असर पड़ने की चिंता सता रही है।
करीब 6 लाख चालकों को भाषा अभियान से जोड़ने की तैयारी
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में लगभग 9.16 लाख ऑटो-रिक्शा और 61,657 टैक्सियां हैं। सरकार का लक्ष्य करीब 6 लाख ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने की पहल से जोड़ना है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक इस अभियान में अब तक 1.65 लाख से अधिक चालक शामिल हो चुके हैं। सरकार का कहना है कि भाषा सीखने का उद्देश्य चालकों को यात्रियों और अधिकारियों के साथ सामान्य बातचीत करने में सक्षम बनाना है।
मुख्यमंत्री बोले- विशेषज्ञ मराठी नहीं, सिर्फ बुनियादी बातचीत जरूरी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी की शर्त का उद्देश्य उन्हें भाषा का विशेषज्ञ बनाना नहीं है। जरूरत के मुताबिक सामान्य बातचीत करने लायक मराठी समझना ही इसका मूल उद्देश्य है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर चालकों को मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय देने पर भी विचार किया जा सकता है।
ऑटो चालक से मंत्री तक का सफर
इस पूरे विवाद के बीच परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का पुराना संघर्ष भी चर्चा में है। राजनीति में आने से पहले वे ठाणे में ऑटो-रिक्शा चलाते थे। शुरुआती दौर में उन्होंने परिवार की आर्थिक मदद के लिए अगरबत्ती और कैलेंडर बेचने का काम भी किया।
समय के साथ उन्होंने कारोबार के क्षेत्र में कदम रखा और बाद में राजनीति में सक्रिय हुए। आज वे महाराष्ट्र सरकार में परिवहन विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और उन्हीं के विभाग के भाषा संबंधी नियम को लेकर ऑटो-टैक्सी चालकों के बीच विरोध देखने को मिल रहा है।
फिलहाल सरकार और ऑटो-टैक्सी चालकों के बीच बातचीत से समाधान निकलने की उम्मीद है। चालकों की मुख्य मांग है कि नियम लागू करने से पहले उन्हें पर्याप्त समय, प्रशिक्षण और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं। वहीं सरकार का कहना है कि नियम का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि यात्रियों और चालकों के बीच बुनियादी संवाद को आसान बनाना है।











