November 2, 2026 8:04 pm

महाराष्ट्र     मंत्री के दौरे और बड़े ऐलान के बाद भी नहीं बदली तस्वीर, उल्हासनगर सेंट्रल अस्पताल में मरीज बेहाल

 

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रिपोर्टर ब्यूरो चीफ — योगेश यादव

PNP News महाराष्ट्र

 

उल्हासनगर | महाराष्ट्र

उल्हासनगर के कैंप-3 स्थित Central Hospital Ulhasnagar की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री के दौरे और अस्पताल के कायाकल्प को लेकर किए गए बड़े ऐलानों के बावजूद जमीनी स्तर पर मरीजों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। डॉक्टरों की कमी, साफ-सफाई की समस्या, जरूरी जांच सुविधाओं में रुकावट और अस्पताल परिसर में आवारा बिल्लियों की मौजूदगी जैसी शिकायतों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जुलाई में हुआ था स्वास्थ्य मंत्री का दौरा

जुलाई 2026 में महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने उल्हासनगर सेंट्रल अस्पताल का दौरा किया था। दौरे के दौरान अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था का जायजा लेते हुए इसे बड़े स्तर पर विकसित करने की घोषणा की गई थी।

बताया गया था कि मौजूदा 200 बेड वाले अस्पताल को करीब 500 बेड के अत्याधुनिक मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय कामगारों के लिए ESIC अस्पताल की क्षमता बढ़ाने और नागरिकों को बेहतर एवं मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया था।

घोषणाएं बड़ी, लेकिन मरीजों की परेशानी अभी भी बरकरार

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की शिकायतों के मुताबिक, अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की कमी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है। ओपीडी और अलग-अलग वॉर्डों में मरीजों की संख्या अधिक होने के बावजूद पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ उपलब्ध नहीं होने से मरीजों और उनके परिजनों को इंतजार करना पड़ता है।

कई मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के साथ-साथ जांच सुविधाओं को लेकर भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सीटी स्कैन, सोनोग्राफी और एक्स-रे जैसी सुविधाओं में तकनीकी खराबी आने पर मरीजों को बाहर की निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जिसका आर्थिक बोझ खासकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ता है।

अस्पताल के बेड पर आवारा बिल्लियों का वीडियो बना चर्चा का विषय

हाल ही में अस्पताल के अंदर एक आवारा बिल्ली के मरीजों के लिए लगाए गए बेड पर आराम करते हुए दिखाई देने का वीडियो सामने आया। वीडियो के बाद अस्पताल की स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर भी सवाल उठने लगे।

मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल जैसी जगह पर साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में वॉर्ड के अंदर आवारा जानवरों की मौजूदगी अस्पताल प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

बारिश के मौसम में बढ़ती मरीजों की भीड़, व्यवस्था पर दबाव

उल्हासनगर में इन दिनों बारिश और उमस भरा मौसम बना हुआ है। मौसम में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण, बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे समय में सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव और अधिक बढ़ जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब बड़ी संख्या में नागरिक सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं, तब डॉक्टर, दवाइयां, जांच सुविधाएं और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। मरीजों को किसी भी हालत में इलाज के लिए असुविधाजनक परिस्थितियों का सामना नहीं करना चाहिए।

अब सवाल सिर्फ घोषणा का नहीं, अमल का है

स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के बाद अस्पताल को 500 बेड के अत्याधुनिक अस्पताल में बदलने की घोषणा ने शहरवासियों में उम्मीद जगाई थी। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक मौजूदा अस्पताल की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा का लाभ आम मरीजों तक पहुंचना मुश्किल है।

अब शहरवासियों की नजर इस बात पर है कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, स्वच्छता, दवाइयों की उपलब्धता, जांच मशीनों की कार्यक्षमता और आवारा जानवरों की समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाता है।

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