मनोज कुमार (जहानाबाद )
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हुलासगंज में जिला परिषद के सरकारी जमीन जिस पर कन्हौज स्थित था आज कन्हौज की जमीन भी गुम हो गई।समय के साथ जर्जर हो चुके कंहौज तो जमींदोज हुआ ही अब उस स्थल पर निजी मकान बन गया।
हुलासगंज स्थित कंहौज जिसे अंग्रेजी सल्तनत में काईन हाउस कहा जाता था तथा इसमें उन आवारा पशुओं को रखा जाता था जो किसानों की फसलों को बर्बाद करते थे।इसके अलावा फसलों को जान बूझ कर मवेशियों से बर्बाद कराये जाने की स्थिति में खेत मालिक उन पशुओं को कंहौज में रख आते थे जहां उन पशुओं को रखनें के एवज में पशुओं के मालिकों से जुर्माना वसूला जाता था।यह प्रक्रिया आजादी के बाद भी चलती रही ।
कन्हौज में पशुओं को न ले जाया जाय इस कारण पशु मालिकों द्वारा अपने मवेशियों पर चरने के दौरान विशेष ध्यान रखा जाता था। कन्हौज के रख रखाव का जिम्मा बाजार समिति के ठेकेदारों की होती थी। तथा सरकार को राजस्व भी मिलती थी। जिसका मुख्यतः संचालन का जिम्मा ज़िला परिषद को था।
कालांतर में कंहौज का भवन एक तो पुराना होंने तथा दूसरे रख रखाव के आभाव में जमींदोज हो गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि हुलासगंज में कंहौज बर्ष 1978तक चला उसके बाद बंद हो गया। वलीपुर के किसान दिनेश प्रसाद ने बताया कि कन्हौज की व्यवस्था रहने से किसानों को काफी सुविधा थी। फसलों को पशु बर्बाद न कर दे इसको लेकर स्वयं पशुपालक काफी सचेत रहते थे।तथा फसल चराने के मुद्दे पर आपस में मारपीट भी नहीं होती थी।
पशुपालन के तरीकों में भी आमूलचूल परिवर्तन होने से कंहौज की अहमियत कम होती गई। चारागाह की शनै शनै कमी होने से पशुओं को चराने की प्रथा समाप्त हो गई। लेकिन जिला परिषद् की जमीन जिस पर कंहौज था अब उस पर निजी मकान बन गया। लोगों द्वारा इस मुद्दे को लेकर कोई बार अंचल कार्यालय को लिखित आवेदन भी दिया लेकिन हैरत ईस बात की है कि आखिर जिला परिषद की जमीन पर कब्जा कर निजी मकान कैसे खड़ी हो गया। स्थानीय लोगों ने चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत हुलास गंज में भी जिला परिषद के जमीन पर अतिक्रमण हटाने की मांग की है।











