पीएनपी न्यूज़ एजेंसी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बलिया। बैरिया विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ कटान, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति तथा बिजली व्यवस्था में व्याप्त समस्याओं को लेकर लगातार की गई शिकायतों पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने गंभीर रुख अपनाते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद द्वारा 20 जुलाई 2026 को जारी पत्र में मण्डलायुक्त, आजमगढ़ को निर्देशित किया गया है कि मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही, यदि किसी स्तर पर लापरवाही अथवा अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए विस्तृत रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए।
समाजसेवी एवं भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता सूर्यभान सिंह ने बताया कि बैरिया विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ कटान, राहत एवं बचाव कार्यों, स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्थाओं तथा बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को लेकर उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी थी। उनका आरोप है कि पूर्व में हुई जांचों के दौरान अधिकारी प्रभावित गांवों में जाकर लोगों के बयान दर्ज करने के बजाय कार्यालय में बैठकर ही रिपोर्ट तैयार कर देते थे, जिससे जमीनी हकीकत सामने नहीं आ सकी।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा बाढ़ सुरक्षा एवं कटान रोकने के लिए पर्याप्त धनराशि स्वीकृत किए जाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। कई गांवों में नदी कटान से परिवारों के आशियाने बह गए, लेकिन प्रभावित लोगों के पुनर्वास, राहत सामग्री तथा घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी। इससे क्षेत्रीय जनता में भारी नाराजगी व्याप्त है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल में बाढ़ सुरक्षा एवं कटान निरोधक कार्यों के लिए स्वीकृत सभी परियोजनाओं, उन पर हुए खर्च, कार्यों की गुणवत्ता तथा कटान पीड़ितों को दी गई राहत एवं सहायता की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, यदि किसी अधिकारी या एजेंसी की लापरवाही अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद अब क्षेत्रवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच टीम इस बार प्रभावित गांवों का स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविक पीड़ितों के बयान दर्ज करती है या नहीं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के आधार पर बाढ़ कटान, स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली व्यवस्था से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी और ठोस कदम उठाए जाएंगे।











