रिपोर्ट: अजीत कुमार सिंह बिट्टू जी, ब्यूरो चीफ, पीएनपी न्यूज़, बलिया
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
सहतवार। दूजा देवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रजौली-सहतवार के प्रबंधक पद की जिम्मेदारी अब उत्कर्ष सिंह को सौंपी गई है। उनके प्रबंधक चुने जाने की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। महाविद्यालय से जुड़े शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, समर्थकों और शुभचिंतकों ने उत्कर्ष सिंह को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।
उत्कर्ष सिंह विधान परिषद सदस्य रविशंकर सिंह ‘पप्पू’ के पुत्र हैं। महाविद्यालय के प्रबंधक पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद उनसे संस्थान के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विकास को नई दिशा देने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि युवाओं के नेतृत्व में महाविद्यालय को शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
प्रबंधक पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद उत्कर्ष सिंह के सामने महाविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती होगी। इसके अलावा महाविद्यालय में आवश्यक विकास कार्यों को गति देना, शिक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाना तथा छात्र-छात्राओं को आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
उत्कर्ष सिंह के प्रबंधक बनने पर समर्थकों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दूजा देवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। लोगों ने उम्मीद जताई कि महाविद्यालय में विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे।
क्षेत्र के लोगों के अनुसार दूजा देवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में संस्थान की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रबंधक की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। उत्कर्ष सिंह के सामने महाविद्यालय की प्रतिष्ठा को और मजबूत करने तथा विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
उत्कर्ष सिंह को नई जिम्मेदारी मिलने पर विभिन्न लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनके कार्यकाल में महाविद्यालय का सर्वांगीण विकास होगा और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।











