November 2, 2026 8:48 pm

बलिया शिक्षा क्षेत्र रेवती मे गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़: वशिष्ठनगर प्राथमिक विद्यालय नंबर 1 में शिक्षकों की लापरवाही उजागर, दस बजे के बाद ही आते है अध्याप

#रेवती, बलिया। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों में जब शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी भूल जाएं, तो गरीब परिवारों के बच्चों के भविष्य का क्या होगा? ऐसा ही कुछ नजारा शिक्षा क्षेत्र रेवती के प्राथमिक विद्यालय वशिष्ठनगर नंबर-1 में देखने को मिला, जहां अध्यापकों की लापरवाही ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) की भावना को तार-तार कर दिया।

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स्थानीय ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद 12 नवंबर 2025 की सुबह कुछ पत्रकार सच्चाई जानने के लिए विद्यालय पहुंचे। सुबह 8:45 से 10:10 बजे तक की निगरानी में यह देख आंखें फटी की फटी रह गईं विद्यालय तो खुल चुका था, सफाई कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे, लेकिन एक भी शिक्षक समय पर मौजूद नहीं था। और बच्चे विद्यालय प्रांगण और विद्यालय के बाहर खेल रहे थे।

 

सूत्रों के मुताबिक, विद्यालय में 8 से 10 शिक्षक तैनात हैं, मगर कोई भी शिक्षक सिर्फ महिला प्रधानाध्यापक और शिक्षा मित्र को छोड़कर ( हालांकि प्रधानाध्यापक भी 9:55 के आस पास विद्यालय मे पहुंची ) 10 बजे से पहले नहीं पहुंचा। वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि विद्यालय की महिला प्रधानाध्यापक शिक्षकों की मनमानी पर नियंत्रण नहीं रख पा रही हैं। महिला और पुरुष, दोनों ही शिक्षक अपनी सुविधा से देर से आते हैं और दोपहर 2:00 से 2:30 बजे के बीच विद्यालय की छुट्टी कर बच्चों को घर भेज देते हैं।

 

गांव के लोगों का कहना है कि बच्चे सुबह 9 बजे से विद्यालय पहुंच जाते हैं, लेकिन शिक्षकों के अभाव में वे खेल-कूद में समय बिता देते हैं। पढ़ाई की शुरुआत तब होती है जब शिक्षक लगभग 10 बजे के बाद विद्यालय में आते हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षण व्यवस्था की लापरवाही दर्शाती है, बल्कि उन मासूम बच्चों के सपनों के साथ अन्याय भी है, जिनके माता-पिता दिन-रात मेहनत कर उन्हें शिक्षित करने की उम्मीद में विद्यालय भेजते हैं।

 

इस पूरे मामले पर जब खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी शिक्षकों को नोटिस जारी कर विभागीय कार्यवाही की जाएगी।

 

लेकिन सवाल अब भी बरकरार है क्या सिर्फ नोटिस से ही इन मासूम बच्चों के बिखरते भविष्य को सँवारा जा सकेगा? शिक्षा व्यवस्था के जिम्मेदारों को यह समझना होगा कि हर देर से आने वाला शिक्षक, एक बच्चे के सपनों को देर नहीं, बल्कि अंधेरे में धकेलता है।

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