लखीमपुर खीरी, 25 सितंबर 2025:
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विद्या भारती विद्यालय, सनातन धर्म सरस्वती शिशु वाटिका में आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर विशेष वंदना सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पार्चन से हुई। विद्यालय की संचालिका हीरा सिंह एवं शिक्षिका रजनी कपूर ने बहन तनिष्का शुक्ला प्रभात (ख) को रोली-तिलक लगाकर जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी।कार्यक्रम में संचालिका हीरा सिंह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और दर्शन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे जनसंघ के राष्ट्रजीवन-दर्शन के निर्माता थे। उनका उद्देश्य स्वतंत्रता की पुनर्रचना के प्रयासों में भारतीय तत्व-दृष्टि प्रदान करना था। उन्होंने भारत की सनातन संस्कृति को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए एकात्म मानववाद की विचारधारा दी। आर्थिक नीति के क्षेत्र में भी उन्हें रचनाकार माना जाता है और उनका मानना था कि आर्थिक विकास का मुख्य उद्देश्य सामान्य मानव का सुख है।कार्यक्रम की संयोजिका रजनी कपूर ने उनके जीवन परिचय पर विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को धनकिया (जयपुर-अजमेर रेलवे लाइन के पास) राजस्थान में हुआ। पिता भगवती प्रसाद उपाध्याय रेलवे में सहायक स्टेशन मास्टर थे। पिता के असमय निधन के बाद वे नाना-नानी के साथ बड़े हुए और शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 1937 में बी.ए. के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर उन्होंने संघ में प्रशिक्षण प्राप्त किया और जीवनभर संघ के प्रचारक रहे।कार्यक्रम का समापन भावपूर्ण वंदे मातरम् के साथ हुआ।
*रिपोर्टर अनिल कुमार निघासन लखीमपुर खीरी*











