November 2, 2026 8:48 pm

नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन

 

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रेवाड़ी, 20 अगस्त जिला रिपोर्टर दीपक तिवारी

 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देश पर इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो करण सिंह, (अधिष्ठाता छात्र कल्याण विभाग) के द्वारा विधिवत रूप से अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।

प्रो करण सिंह ने संबोधन में जीवन के छोटे-छोटे उदाहरण देकर नियमित शिक्षा व दूरस्थ शिक्षा में अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान का होना भी परम आवश्यक है। हम अपने नैतिक मूल्यों, कर्तव्यों, संस्कारों का ध्यान रखें। सर्वोत्तम शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं अपितु जीवन के हर अनुभव से प्राप्त होती है। विभागाध्यक्ष डॉ. मंजु पुरी ने मुख्य अतिथि प्रो करण सिंह का पौधा देकर स्वागत अभिनंदन किया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन तपस्या का जीवन है। हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास, संकल्प और कठिन परिश्रम के साथ आगे बढ़ना होगा। हमारा आत्मविश्वास मजबूत होगा तो हम जीवन में असंभव को भी संभव कर सकते हैं। जीवन में असंभव जैसा कुछ भी नहीं होता है।

उन्होंने कहा कि हमने स्नातक और स्नातकोत्तर का पाठ्यक्रम नई शिक्षा पद्धति के अनुरूप तैयार किया है। हमने द्वितीय सेमेस्टर के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम को जोड़ा है जो हमारे विद्यार्थियों को सीधे-सीधे रोजगार से जोड़ता है। हम अपने छात्रों को श्रेष्ठ नागरिक बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। आज समाज में नैतिक मूल्य, परंपराओं का पतन हो रहा है। हिंदी हमारी मातृभाषा है, राष्ट्रभाषा है। साहित्य के विद्यार्थी का यह पहला उद्देश्य बन जाता है कि वह अपने सर्वांगीण विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं का भी संवर्धन करें।

डॉ. अर्चना ने सभी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली एवं विभाग की कार्य प्रणाली से अवगत कराया।

राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई समन्वयक डॉ. अनीता और डॉ. संदीप ने राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यशैली के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी। कार्यक्रम संयोजक डॉ. जागीर नागर ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता इसके लिए हमें कठोर परिश्रम के साथ अच्छाई और सच्चाई के पथ पर आगे बढ़ना होगा। जब तक हमें हमारा लक्ष्य प्राप्त न हो जाए हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए। मार्ग की असफलताएं हमारे मार्ग को अवरुद्ध करने के लिए नहीं आती अपितु हमें ओर मजबूत बनाने के लिए होती है।

धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ. शकुंतला ने कहा कि जीवन में प्रत्येक चीज हमें कुछ ना कुछ सिखाती है यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम उसे सकारात्मक सोचे या नकारात्मक। कार्यक्रम के पश्चात डॉ. शकुंतला और डॉ. अर्चना के निर्देशन में विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय का भ्रमण किया एवं वहां की कार्यशैली को जाना। इस अवसर पर हिंदी विभाग के सभी छात्र एवं प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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