November 2, 2026 7:34 pm

नए आपराधिक कानूनों पर पुलिस अधीक्षक ने की पत्रकारों से वार्ता।

 

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संवाददाता अजीत कुमार सिंह
बलिया। रिज़र्व पुलिस लाइन सभागार में आज पुलिस अधीक्षक बलिया ओमवीर सिंह ने जिले के सभी सम्मानित पत्रकार बंधुओं के साथ नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता (BNS-2023), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS-2023) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA-2023) के संबंध में जन-जागरूकता अभियान के तहत प्रेस वार्ता की।
इस दौरान एसपी ने बताया कि इन नए कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाना है। इनमें महिलाओं, बच्चों एवं आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए कठोर प्रावधान किए गए हैं।
*मुख्य बिंदु एवं विशेष प्रावधान*:-
1. *अपराधों की नई परिभाषा और सख्त दंड*:- बीएनएस, 2023 में संगठित अपराध, अपहरण, भूमि कब्जा, साइबर अपराध आदि को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। हिट एंड रन के मामलों में सजा बढ़ाकर 10 वर्ष तक कर दी गई है।
2.*आतंकवाद पर सख्ती*:-
बीएनएस की धारा 113 में पहली बार आतंकवादी गतिविधियों को अपराध घोषित किया गया है, जो UAPA, 1967 से प्रेरित है।
3. *गलत सूचना पर रोक*:-
धारा 353 के तहत जानबूझकर झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाने पर सजा का प्रावधान किया गया है। धारा 197 के अनुसार भारत की संप्रभुता को प्रभावित करने वाली फर्जी खबरें भी अपराध मानी जाएंगी।
4. *लैंगिक न्याय और यौन अपराधों पर कड़ा रुख* :-
धारा 69 के तहत धोखे से यौन संबंध बनाना अपराध घोषित किया गया है।
गैंगरेप से संबंधित धारा 70(2) में उम्र सीमा 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दी गई है।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को एक ही अध्याय में समाहित कर न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
5. *सामुदायिक सेवा और विदेशी अपराधों पर प्रावधान*:-
मामूली अपराधों में अब दंड स्वरूप सामुदायिक सेवा कराई जा सकेगी। साथ ही, विदेशों में किए गए अपराधों पर भी मुकदमा चलाने की व्यवस्था की गई है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS-2023)
BNSS में कुल 39 अध्याय और 531 धाराएँ हैं। इसमें ई-एफआईआर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, और डिजिटल साक्ष्य से जुड़ी व्यवस्थाएँ शामिल हैं। ई-एफआईआर सुविधा पीड़ित कहीं से भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
जीरो एफआईआर किसी भी थाने में दर्ज कराई जा सकती है, जिसे बाद में उचित थाने में भेजा जाएगा।
*फोरेंसिक जांच*:- वैज्ञानिक जांच को बढ़ावा देने हेतु अपराध स्थल की रिकॉर्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को अनिवार्य किया गया है।

 


*वीडियो कार्यवाही*:- अभियुक्त और गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दर्ज किए जा सकेंगे।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA-2023)
नए अधिनियम में 170 धाराएँ हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किया गया है और औपनिवेशिक शब्दों को हटाकर सरल हिंदी-हिन्दुस्तानी भाषा अपनाई गई है। “पागल” जैसे शब्दों की जगह “विकृत चित्त वाला व्यक्ति” का प्रयोग किया गया है।
“ज्यूरी” और “क्राउन” जैसे शब्दों को हटाकर “एडवोकेट” जैसे आधुनिक शब्द जोड़े गए हैं।
यदि कोई अभियुक्त फरार हो जाता है, तो भी संयुक्त मुकदमा अब जारी रह सकेगा।
*पुलिस अधीक्षक का संदेश*:-
एसपी ओमवीर सिंह ने कहा कि—
“नए आपराधिक कानून आम नागरिक को सशक्त बनाने, अपराधियों को शीघ्र दंड दिलाने और न्याय प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं। इन कानूनों की जानकारी हर नागरिक तक पहुँचना आवश्यक है।”
इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) कृपा शंकर, अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) दिनेश कुमार शुक्ल, प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक सुधीर कुमार सिंह, प्रतिसार निरीक्षक राम बेलास, पीआरओ पुलिस अधीक्षक रत्नेश दूबे एवं जिले के सभी सम्मानित पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।

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