Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
धारूहेड़ा 25 जुलाई रिपोर्टर महेश कुमार
धारूहेड़ा शहर में सीवर नालों और बरसाती नालों की हालत इतनी दयनीय है कि उन्हें बयान करने के लिए शब्द ही नहीं हैं। ये कीचड़, पॉलीथीन की थैलियों, प्लास्टिक की बोतलों और कई अन्य सामग्रियों से भरे पड़े हैं। मानसून से पहले इनकी सफाई ही नहीं की गई। शहर के सभी हिस्सों में यही स्थिति है। यहाँ तक कि कई जगहों पर सर्विस रोड पर भी नालों की चारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे अनचाही दुर्घटनाएँ हो रही हैं।
नालियों के जाम होने के कारण कई जगहों पर पानी जमा हो गया है जिससे बहुत दुर्गंध आ रही है। डेंगू जैसी कई तरह की बीमारियाँ फैलने का खतरा बना हुआ है। इन नालों पर दवा छिड़कने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है।
हालत और भी दयनीय है कि कई जगहों पर ये खुले पड़े हैं और सीमेंट के ब्लॉकों से ढके नहीं हैं। सरकारी अधिकारियों की ओर से कोई भी इन नालों की देखभाल और इन पर कार्रवाई करने के लिए उत्सुक नहीं है। माननीय मुख्यमंत्री का आदेश बहुत स्पष्ट और सख्त था कि इस प्रकार का कार्य जून के मध्य तक पूरा कर लिया जाना चाहिए, लेकिन खानापूर्ति के अलावा कुछ नहीं किया गया।











