संवाददाता मनोज कुमार जहानाबाद
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हुलासगंज स्थित श्री स्वामी पराङ्कुशाचार्य आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में गुरुवार को महाविद्यालयीय सभागार में “साहित्यशास्त्र की उत्पत्ति और विकास” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. के. उन्निकृष्णन ने स्वागत भाषण देते हुए मुख्य अतिथि एवं उपस्थित विद्वानों का अभिनंदन किया तथा महाविद्यालय की गौरवशाली शैक्षणिक परंपराओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री हरेरामाचार्य जी ने की, जिन्होंने मुख्य अतिथि का पुष्पमाला से स्वागत किया।
मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गुरुवायूर परिसर (केरल) के आचार्य प्रो. पी. सी. मुरलीमाधवन ने साहित्यशास्त्र की उत्पत्ति एवं विकास पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय काव्यशास्त्र की प्राचीन परंपरा, रस सिद्धांत, ध्वनि सिद्धांत एवं अलंकार सिद्धांत पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही भरतमुनि, आनंदवर्धन एवं मम्मट जैसे महान आचार्यों के योगदान को रेखांकित करते हुए साहित्य को समाज के सांस्कृतिक एवं नैतिक उत्थान का सशक्त माध्यम बताया। उनका व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।
इस अवसर पर प्रो. मुरलीमाधवन की धर्मपत्नी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में प्राध्यापक डॉ. गिरेंद्र शर्मा, डॉ. सच्चिदानंद, डॉ. श्रीनिवास शर्मा, डॉ. ईश्वरी दयाल सिंह, डॉ. लक्ष्मण शर्मा, डॉ. आलोक कुमार पांडेय उपस्थित रहे। वहीं गैर-शिक्षण कर्मचारियों में कौस्तुभ कुमार, धनंजय शर्मा, मुचकुंद तिवारी, पिंटू कुमार, वेंकटेश पाठक एवं कविंद्र राम की सहभागिता रही। महाविद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. लक्ष्मण शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। समापन “सर्वे भवन्तु सुखिनः” एवं शांति पाठ के साथ हुआ। तत्पश्चात सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था की गई।











