
*ग्राहकों से मोटी रकम लेने के बाद भी होती है कम सामग्रियां सप्लाई*
*खनिज अधिकारी तो बंद कमरे में बैठ कर हासिल कर रही है उपलब्धियां*
रीवा ही नहीं मध्यप्रदेश में खनिज पदार्थ की कालाबाजारी एवं दोहन किया जा रहा है। आयें दिन खनिज पदार्थ कों लेकर हंगामा होता रहता है विधानसभा में भी मामले आते हैं फिर गधे की सींगों की तरह कहां चले जाते हैं यह बहुत कठिन विषय है चंबल के बाद रीवा संभाग खनन कारोबार का सबसे बड़ा केंद्र है। राष्ट्रीय कोल ब्लॉक सिंगरौली के साथ-साथ सिंगरौली एवं सीधी, शहडोल में बालू खनन एवं बिक्री का प्रदेश स्तरीय कारोबार किया जाता है। बालू के खनन कारोबार में सरकार की सीधी पकड़ रहतीं हैं। तथा इसके कारोबारी सरकार के भरपूर करीब रहते हैं। उसी तरह से रीवा शहर के चारों तरफ पत्थर गिट्टी का साम्राज्य है। खनिज विभाग में बाबू, निरीक्षक से लेकर जिला खनिज अधिकारी एवं पुलिस विभाग में तैनात सिपाही तक सभी गिट्टी की गाड़ियों का हिसाब करते हुए मालदार हो रहें हैं। वर्तमान समय में रीवा में पदस्थ खनिज अधिकारी सामान्य रूप से न तो किसी से मिलना पसंद करती न कोई शिकवा, शिकायत सुनने की आदी हैं। ख़ास तौर पर पत्रकारों को तो कार्यालय में नहीं आने के लिए एक पंपलेट चस्पां करा दिया गया है। उसके पीछे क्या कारण है यह खनिज अधिकारी ही बता सकतीं हैं हो सकता है खनिज विभाग में होने वाली अवैध वसूली में हिस्सा या चंदा मांगने वाले मिडिया वालो की संख्या बढ़ी हो और परेशान होकर पत्रकारों को मिलने से प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि किसी सार्वजनिक स्थान एवं शासकीय कार्यालयों में जहां सूचना का अधिकार लागू हो आम जनता के लिए कार्यालय व शासन द्वारा खोला गया है उसमें किसी प्रशासनिक अधिकारी की वगैर अनुमति इस तरह का पंप लेट चस्पां करना आम जनता से नहीं मिलना सिर्फ अपने अधिनस्थों या मोटी पूंजी वाले ठेकेदारो तक सीमित रहना किसी तानाशाही की प्रक्रिया से कम नहीं मापा जा सकता है। हालांकि जिला प्रशासन भी इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा देने का ही पक्षधर हैं रीवा शहर में या जिले में बालू, गिट्टी सप्लाई करने वाले ट्रक मालिक हाईवा मालिक पहले ऊपर हिस्सा को एक फिट कटवा कर छोटा किया उसके साथ ही चोरी करने का एक मोटा मार्ग बना लिया है। कि हाईबा या डंफर में फर्स के ऊपर एक फिट ऊंचाई की प्लेट या पटरा लगवा लिया है। जिसमें लगभग एक से दो टा्ली बालू कम लोड होती है लेकिन ऊंचाई अधिकतम नजर आती है और मनमानी कीमत पर बेची जा रही है यह चोरी की आंतरिक व्यवस्था वर्तमान समय में हर गाड़ी में की जा रही है जबकि हर गाड़ी की कंपनी से साइज़ निर्धारित है उस साइज़ का परिवहन विभाग में फिटनेस करने के बाद पंजीकरण किया जाता है। यह चोरी एवं जनता को कम सामग्रियां सप्लाई करने वालो को खनिज अधिकारी एवं विभाग का पूरा संरक्षण प्राप्त है। ख़ास तौर पर ऐसे काम करने वाले एवं क्रेशर संचालक हर महीने की पांच तारीख से पहले गाड़ियों की सूची एवं सहयोग राशि निर्धारित अड्डे पर जमा कर दी जाती है। फिर जनता के जेब में डाका डालने का अनवरत सिलसिला जारी रहता है।
PNP NEWS से रिपोर्टर आशीष मिश्रा की खास रिपोर्ट











