November 2, 2026 8:06 pm

कहां जाए बेसहारा गौवंश.? डीसी बोले; गांवों में तलाश करें जमीन

 

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रेवाड़ी, 10 जुलाई जिला रिपोर्टर दीपक तिवारी

शहर में गोशालाओं की क्षमता पूरी तरह भर चुकी है। गोवंश पकड़ने का कार्य बंद कर दिया गया है। परिणामस्वरूप, सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश अब लोगों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। वहीं डीसी कह रहे हैं कि बेसहारा गौवंश का उचित प्रबंध करने के लिए जिला की मौजूदा गौशालाओं में पशुओं की क्षमता का आकलन किया जाएगा।

डीसी अभिषेक मीणा ने बेसहारा पशुओं का गौशालाओं में समायोजन तथा सामाजिक व प्रशासनिक स्तर पर इन पशुओं का प्रबंधन करने के लिए बुलाई गई बैठक में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगर परिषद और पशुपालन विभाग के अधिकारी सभी गौशालाओं का अवलोकन करें और उनमें मौजूदा पशुओं की संख्या तथा नए सैड, चारा आदि का प्रबंध कर और कितने पशु रखने की क्षमता का आकलन करे।

डीसी ने कहा कि रेवाड़ी नगर परिषद के पास नंदीशाला के लिए जमीन नहीं है तो साथ लगते गांवों में जमीन की तलाश की जाए, जहां नंदीशाला स्थापित कर बेसहारा पशुओं को रखा जा सके। पशुपालन विभाग सभी गौशालाओं में पशुओं के समायोजन के साथ नया स्ट्रक्चर तैयार करने के लिए संभावित ग्रांट की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें।

नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुशील भुक्कल ने बताया कि रेवाड़ी शहर में करीब 1500 आवारा पशु है। बावल नगर पालिका सचिव प्रशांत परासर ने बताया कि बावल और धारूहेड़ा में करीब 200 बेसहारा पशु है। पशुपालन विभाग के डॉ नसीब सिंह यादव ने बताया कि जाटूसाना गौशाला को जल्द ही 35 लाख की ग्रांट मिल जाएगी। उन्होंने बैठक में बगथला, जाटूसाना, मामडिया हसन, धारूहेडा आदि में स्थापित गौशालाओं में बेसहारा पशुओं की समायोजन संख्या के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक गौशाला में 50 से 150 तक की संख्या में गाय, नंदी आदि को भेजा जा सकता है।

इस अवसर पर सेनेटरी इंस्पेक्टर सुधीर कुमार, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेन्द्र सारवान, कार्यकारी अभियंता पंचायती राज नरेन्द्र गुलिया, विभिन्न गांवों से आए गौशाला प्रबंधक हंसराज, सत्य मुनि, महावीर सिंह, विजयपाल, जयसिंह, कैप्टन ओमप्रकाश मौजूद रहे।

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