रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या राबर्ट्सगंज सोनभद्र PNP news।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सोनभद्र विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आउटसोर्सिंग व्यवस्था को जवाबदेह, पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाने संबंधी दिए गए निर्देशों का स्वागत करते हुए आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन सरकार की मंशा के विपरीत कार्य कर रहा है।समिति का कहना है कि ऊर्जा निगमों में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को यूपीकोस के दायरे में लाने में लगातार बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, जबकि बड़ी संख्या में संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को सेवा से बाहर भी किया जा रहा है।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था तकनीक आधारित, जवाबदेह और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने वाली होनी चाहिए, लेकिन ऊर्जा निगमों में इसके विपरीत स्थिति दिखाई दे रही है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
शासन ने ठुकराया प्रस्ताव, फिर भी नहीं लागू हुई यूपीकोस व्यवस्था
समिति के अनुसार दिसंबर 2024 में पावर कॉरपोरेशन ने शासन को पत्र भेजकर ऊर्जा निगमों के आउटसोर्स कर्मचारियों को यूपीकोस से अलग रखने का अनुरोध किया था, जिसे अप्रैल 2025 में शासन स्तर पर अस्वीकार कर दिया गया। इसके बावजूद आज तक ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों को यूपीकोस व्यवस्था में शामिल नहीं कियागया है। संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि जब सरकार और मुख्यमंत्री आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक समान, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था चाहते हैं तो फिर इस नीति को लागू करने में देरी क्यों की जा रही है।
25 हजार कर्मियों की छंटनी से बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
समिति का कहना है कि ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा हटाए गए आउटसोर्स एवं संविदा कर्मियों को वापस लेने के निर्देश दिए जाने के बावजूद 25 हजार से अधिक कर्मचारियों को अब तक बहाल नहीं किया गया है। इससे बिजली व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने में कठिनाइयां आ रही हैं।संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिनों में यह 36 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है। ऐसे समय में अनुभवी आउटसोर्स और संविदा कर्मियों की सेवाएं बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं।मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्वयं हस्तक्षेप कर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को निर्देश देने की मांग की है कि सभी आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों को तत्काल बहाल कर यूपीकोस के अधीन लाया जाए। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों के प्रति वही जवाबदेह, पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए जिसकी अपेक्षा मुख्यमंत्री ने अपनी समीक्षा बैठक में व्यक्त की है।
आंदोलनों से जुड़े मुकदमे और कार्रवाई वापस लेने की मांग
संघर्ष समिति ने मार्च 2023 से अब तक विभिन्न आंदोलनों के दौरान बिजली कर्मियों और पदाधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक, दंडात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को भी वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि संवाद, विश्वास और कर्मचारी हितों की सुरक्षा के माध्यम से ही प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो इसका असर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।











