November 2, 2026 10:35 pm

राव की दहाड़ से फिर कांपी भाजपा! अहीरवाल में हाईकमान नहीं, अभी भी राव दरबार का चलता है फरमान 

रेवाड़ी 22 अप्रैल चीफ ब्यूरो दीपक तिवारी

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हरियाणा की राजनीति में भाजपा चाहे लाख दावा करे कि पार्टी संगठन से चलती है, लेकिन अहीरवाल आते-आते उसका सारा सिस्टम घुटनों पर नजर आता है। नगर निकाय चुनाव को लेकर दिल्ली में हाईकमान की बैठक हुई, रेवाड़ी और धारूहेड़ा के नाम लगभग तय बताए गए, बस घोषणा बाकी थी… लेकिन तभी मैदान में उतरे राव इंद्रजीत सिंह और फिर पूरी लिस्ट पर ब्रेक लग गया।

सवाल सीधा है—क्या भाजपा अहीरवाल में सिर्फ पोस्टर भर है और असली ताकत अब भी राव इंद्रजीत सिंह के हाथ में है। अगर नहीं, तो हर बार सूची क्यों रुकती है।हर बार आखिरी समय पर समीकरण क्यों बदलते हैं।हर बार दिल्ली को राव साहब की तरफ क्यों देखना पड़ता है।

सच्चाई यह है कि भाजपा अहीरवाल में चुनाव लड़ती जरूर है, लेकिन लड़ाई जीतने के लिए उसे राव इंद्रजीत सिंह की छतरी चाहिए। बिना उनके समर्थन के पार्टी को अपनी जमीन खिसकती नजर आती है। यही डर भाजपा को बार-बार झुकने पर मजबूर करता है।

मानेसर नगर निगम चुनाव इसका सबसे बड़ा सबूत है। भाजपा ने राव खेमे को नजरअंदाज किया, अपना उम्मीदवार उतारा, पूरी ताकत लगाई, सत्ता का दम दिखाया… लेकिन नतीजा क्या हुआ। राव साहब ने अपने समर्थक डॉक्टर इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतारा और भाजपा की पूरी ताकत को ध्वस्त कर दिया। मेयर की कुर्सी भाजपा नहीं, राव समर्थक ले गए। यह हार नहीं थी, यह भाजपा के अहंकार पर तमाचा था।

अब रेवाड़ी और धारूहेड़ा में फिर वही तस्वीर बन रही है। दिल्ली में बैठकें हो रही हैं, रणनीति बन रही है, लेकिन आखिरी फैसला वहीं अटक गया जहां हर बार अटकता है—राव इंद्रजीत सिंह की मर्जी पर। भाजपा चाहे जितना इनकार करे, लेकिन अहीरवाल में बिना राव की सहमति के टिकट बांटना आग से खेलने जैसा है।

भाजपा के लिए यह सबसे शर्मनाक स्थिति है कि सत्ता में होने के बावजूद वह अपने ही क्षेत्रीय नेता के सामने बार-बार बेबस दिखती है। अगर पार्टी झुकती है तो संदेश जाएगा कि संगठन कमजोर है। अगर नहीं झुकती तो बगावत तय है। यानी हर तरफ से भाजपा घिरी हुई है।

आज फैसला सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं है, आज फैसला भाजपा की हैसियत का है। क्या पार्टी इस बार रीढ़ दिखाएगी या फिर एक बार फिर राव दरबार में हाजिरी लगाएगी।क्या कमल अपने दम पर खिलेगा या फिर राव की मर्जी से ही खिल पाएगा।

अहीरवाल में फिलहाल एक ही सच्चाई है—भाजपा सरकार चला सकती है, लेकिन राजनीति अभी भी राव इंद्रजीत सिंह के इशारे पर चलती दिख रही है।

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