जाड़े में दूधारू पशुओं की करें हिफाजत वर्ना लग सकता है आर्थिक चप
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मनोज कुमार
जहानाबाद
जाड़े के मौसम में खासकर जब तापमान में काफी गिरावट होती है तब इसका प्रतिकूल असर पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। सबसे पहले तो दूग्धोत्पादन में गिरावट होती है जबकि दूध देने वाले पशुओं के पोषण प्रबंधन का लागत बढ़ जाता है।ठंड में सबसे अधिक ध्यान नवजात बछड़ों पर देना जरूरी होता है। पशुओं में जाड़े में होने वाली बीमारियों के संबंध में हुलास गंज पशु अस्पताल के चिकित्सक डॉ सत्यप्रिये ने बताया कि ठंड के मौसम में पशुओं को कई बीमारियां हो सकती हैं, जैसे सर्दी-जुकाम, निमोनिया, खुरपका-मुंहपका, ब्रोंकाइटिस और थनैला रोग। ठंड से पशुओं में सांस की बीमारियां जैसे निमोनिया और ब्रोंकाइटिस आम हैं, जो ठंडी हवा और नमी से फैलती हैं। अफारा रोग ज्यादा दलहनी चारे से होता है,।गोशाले की सफाई जाड़े के दिनों में बेहतर ढंग से नहीं हो पाता तथा मवेशियों को नहलाया भी नहीं जाता है जिसके कारण गोशाला में विभिन्न रोगों के बैक्टीरिया का प्रकोप बढ़ जाता है। गंदगी के कारण थनैला रोग तेज़ी से पनपता है।खुरपका-मुंहपका (FMD) भी ठंड में बढ़ जाता है।
उन्होंने बचाव के संबंध में बताया कि पशुपालकों को पशुशाला में व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।फूस, टाट या बोरी से हवा रोकने की व्यवस्था हो,फर्श सूखी रहे जमीन पर पराली या पुराने कपड़े बिछाएं, और छत पर घास डालें। अलाव जलाकर गर्मी दें, लेकिन हवा का संचार रखें। आहार और पानी महत्वपूर्ण तथ्य है।गुड़-अजवाइन दूधारू पशुओं के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि पानी गुनगुना रहे पानी और चारा संतुलित होना जरूरी है। सर्दी से पहले टीका और कृमिनाशक दवा आवश्यक है। इसके अलावा अगर पशु बीमार हो तो स्वस्थ्य पशुओं से अलग रखने की व्यवस्था होना जरूरी है ताकि संक्रमण न फैले। शेड साफ रखें और गीलेपन से बचाएं। इन उपायों से दूध उत्पादन भी बना रहता है।











