धारूहेड़ा – 8 जनवरी ब्यूरो चीफ दीपक तिवारी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से निकल रहे केमिकल व रसायन युक्त प्रदूषित पानी को साहबी बैराज में डाले जाने की चर्चाओं ने एक बार फिर क्षेत्र में चिंता और आक्रोश बढ़ा दिया है। इस गंभीर पर्यावरणीय खतरे को लेकर गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, हरियाणा के मुख्यमंत्री सहित केंद्र व राज्य सरकार के अन्य संबंधित माननीयों को पत्र भेजकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।प्रकाश यादव ने अपने पत्रों में स्पष्ट किया है कि भिवाड़ी से आ रहा प्रदूषित पानी पहले ही धारूहेड़ा–भिवाड़ी बाईपास, आसपास की कॉलोनियों और गांवों में जलभराव, दुर्गंध, बीमारियों और सड़क हादसों का कारण बन चुका है। अब इस गंदे पानी को सहाबी बैराज में डालने की योजना या चर्चाएं सामने आना बेहद खतरनाक संकेत हैं।उन्होंने पत्रों में उल्लेख किया है कि साहबी बैराज और इसके आसपास के गांव पहले से ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के दूषित पानी की मार झेल रहे हैं। इसके चलते भूजल प्रदूषित हो रहा है, खेती प्रभावित हो रही है और कैंसर, त्वचा व पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यदि भिवाड़ी का औद्योगिक केमिकल युक्त पानी भी यहां डाला गया तो पूरा क्षेत्र प्रदूषण का स्थायी शिकार बन जाएगा।प्रकाश यादव ने सवाल उठाया है कि जब बिना बारिश के भी भिवाड़ी की तरफ से लगातार प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है, तो मानसून के दौरान इसे रोकने की क्या गारंटी है? ऐसी कौन सी छलनी होगी जो बारिश के पानी और प्रदूषित पानी को अलग करेगी। क्या साहबी बैराज और आसपास के गांवों को ही हर बार औद्योगिक लापरवाही और प्रशासनिक असफलता की कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि साहबी बैराज सहित जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए वे पहले भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, और आगे भी जरूरत पड़ी तो न्यायिक व संवैधानिक मंचों का दरवाजा खटखटाया जाएगा।प्रकाश यादव का कहना है कि समस्या को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करना समाधान नहीं है। आवश्यक है कि भिवाड़ी में ही औद्योगिक व सीवेज जल का वैज्ञानिक तरीके से ट्रीटमेंट हो, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्त कार्रवाई की जाए और साहबी बैराज जैसे प्राकृतिक जलस्रोतों को किसी भी हाल में प्रदूषण का डंपिंग ज़ोन न बनने दिया जाए।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि यह मुद्दा अब केवल जलभराव या सड़क तक सीमित नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, पर्यावरण सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।











