Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
मनोज कुमार
जहानाबाद
नालंदा और जहानाबाद जिले के लिए कभी महत्वपूर्ण जलस्रोत रही मुहाने नदी आज अपने अस्तित्व के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। लगभग 21 किलोमीटर लंबी यह नदी जहानाबाद जिले के हुलासगंज थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर गांव के पास फल्गु नदी से निकलकर नालंदा जिले के इस्लामपुर, एकंगरसराय तक बहती थी, लेकिन अब यह नदी पूरी तरह समाप्तप्राय हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार मुहाने नदी का उद्गम फल्गु नदी से हुलासगंज प्रखंड के इब्राहिमपुर गांव के समीप मोहद्दीपुर गांव के पास था। वर्ष 1960-65 के दौरान फल्गु नदी पर सरकार की महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना के तहत बीयर और नहरों का जाल बिछाया गया। इसी दौरान प्रशासन ने यह आशंका जताते हुए कि बीयर से छोड़ा गया पानी मुहाने नदी के रास्ते आगे न निकल जाए, नदी के मुहाने को स्थायी रूप से बंद कर दिया।
हालांकि वर्ष 1975 में फल्गु नदी में आए भीषण सैलाब के दौरान आसपास के गांवों में जलभराव और तबाही शुरू हो गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने मुहाने नदी का मुंह अस्थायी रूप से खोल दिया था। बाद में फिर इसे बेहतर और स्थायी तरीके से बंद कर दिया गया।
मुहाने नदी का मुंह बंद होते ही इसका प्राकृतिक प्रवाह रुक गया। धीरे-धीरे नदी की जमीन समतल भूमि में बदल गई और उस पर खेती शुरू हो गई। आज स्थिति यह है कि नदी के जलग्रहण क्षेत्र में सैकड़ों गांव, टोले और खेत बस चुके हैं, जहां धान और गेहूं की फसलें लहलहा रही हैं।
कभी यह नदी नालंदा जिले के इस्लामपुर, हिलसा, परवलपुर, बेन, थरथरी, चंडी, नगरनौसा और हरनौत जैसे क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा मानी जाती थी। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और दीर्घकालिक जल प्रबंधन की कमी के कारण यह नदी इतिहास बनती जा रही है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते मुहाने नदी के पुनर्जीवन के लिए ठोस योजना नहीं बनाई गई, तो आने वाले वर्षों में जल संकट और भी गहराएगा। इसके लिए सबसे पहले जनजागरण और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है, तभी इस नदी को दोबारा जीवन मिल सकता है।











