November 2, 2026 9:35 pm

जहानाबाद बिहार:डेयरी फार्मिंग में सेक्स सौर्टेड सीमेन के प्रति पशु पालकों में उत्साह की कमी ——-

मनोज कुमार (जहानाबाद )

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सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक, पशु प्रजनन के क्षेत्र में एक नवीनतम तकनीक है. इस तकनीक में, सांढ के सीमेन  को संसाधित किया जाता है. इसमें, सीमेन से शुक्राणु कोशिकाओं में मौजूद ‘वाई’ क्रोमोसोम को हटा दिया जाता है या मार दिया जाता है. वीर्य में केवल ‘X’ गुणसूत्र होने से यह सुनिश्चित होता है कि मादा बछड़ा पैदा हो. इस तकनीक में, प्रयोगशाला में सीमेन से ‘वाई’ शुक्राणु को हटा दिया जाता है. इससे मादा बछिया होने की संभावना 90 प्रतिशत से ज़्यादा हो जाती है.।

जैसा कि यह अनुमान लगाया जाता था कि इस नए तकनीक से पशुपालकों को सर्वाधिक फायदा होगा चुके केवल बछिया ही जन्म लेगी तथा नर पशुओं का प्रजनन रूक जाएगा। इससे नस्ल सुधार तथा दूगधोत्पादन में आशातीत वृद्धि होगी जिससे किसानों की आय में दुगनी वृद्धि होगी। लेकिन पशुपालकों के रूझान पर अगर गौर फ़रमाया जाय तो कोई विशेष उत्साह नहीं देखी जा रही है। सेक्स शौर्टेड सीमेन की आपूर्ति सरकारी मवेशी अस्पतालों के साथ साथ कम्फेड के तहत चल रहे वैसे समितियों में किया जा रहा है जंहा एक आई की सुविधा उपलब्ध है। इसके प्रति उदासीनता के कारणों के संबंध में सेरथूआ के डेयरी व्यवसायी संतोष शर्मा ने बताया कि सेक्स शौर्टेड सीमेन अनुदानित दर पर तीन सौ रुपए प्रति सीमेन उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि गाय को एक बार एक आई कराने पर गाय गर्भ रख लें। हालांकि इसके पीछे कयी कारण है।गाय में इन्फेक्शन होना या कुपोषण होना ऐसे कारण हैं जिससे गाय एक बार में गंभीर नहीं हो सकती।मगध दूग्ध संघ गया के माध्यम से हर समितियों को इस नये तकनीक का सीमेन तो उपलब्ध करवाया जा रहा है ।

सेक्स सॉर्टेड सीमेन में शुक्राणुओं की संख्या, पारंपरिक वीर्य की तुलना में बहुत कम होती है. इसलिए, इसके इस्तेमाल से गर्भाधान की संभावना पारंपरिक वीर्य से लगभग 10-15% तक कम होती है. इसका इस्तेमाल उन क्षेत्रों में ज़्यादा फ़ायदेमंद है, जहां कृत्रिम गर्भाधान का काम अच्छा चल रहा है

सेक्स सॉर्टेड सीमेन टेक्नोलॉजी भारत में पशुपालन के क्षेत्र में एक वरदान की तरह साबित हो सकती है क्योंकि इस तकनीक के द्वारा मादा पशुओं के दर में बढ़ोतरी होगी एवं आवारा नर पशुओं की संख्या में कमी आएगी जो कि हमेशा पशुपालन की लागत को बढ़ाते हैं, जिसकी वजह से किसान परेशान होता है और पशुपालन छोड़ने की ओर प्रेरित रहता है। ज्यादा संख्या में मादा पशुओं के पैदा होने पर उनके उत्पादन में वृद्धि होगी, इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

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