Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
लखीमपुर। जब साहस अपने चरम पर हो और सेवा की भावना रक्त में प्रवाहित हो, तब जन्म लेते हैं वे योद्धा, जिन पर सम्पूर्ण राष्ट्र को गर्व होता है। ऐसा ही एक नाम है – लेफ्टिनेंट कर्नल प्रियंक पुरी, जिन्होंने लेह-लद्दाख की विकट ऊँचाइयों पर स्थित माउंट नन (19,270 फीट) की गोद में, जान की बाज़ी लगाकरb पांच सैनिकों का जीवन बचाया। प्रतिकूल मौसम और हेलीकॉप्टर की सीमाओं को परास्त करते हुए उन्होंने जिस वीरता और धैर्य का परिचय दिया, वह भारतीय सेना के आदर्शों की सजीव मूर्ति बन गया।उनकी इसी अनुपम बहादुरी के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें 15 अगस्त 2024 को ‘सेना मेडल (शौर्य)’ से अलंकृत किया गया।इस कार्य की स्मृति को चिरस्थायी बनाने हेतु खत्री वूमेन फाउंडेशन ने लेफ्टिनेंट कर्नल प्रियंक पुरी को विशेष सम्मान प्रदान किया।कार्यक्रम की शोभा बनीं संस्थान की निर्देशक समता मेहरोत्रा, उप-निदेशक ज्योति पुरी, अध्यक्ष प्रीति कपूर, उपाध्यक्ष साधिक कपूर, सचिव शिखा धवन, कोषाध्यक्ष सपना मेहरोत्रा एवं संपादक रूपाली महेन्द्रा, जिन्होंने इस गौरवशाली क्षण को आत्मीयता से संजोया प्रियंक पुरी के इस अमर गाथा के साक्षी हैं उनके माता-पिता पंकज पुरी एवं प्रीति पुरी, पत्नी चारू पुरी, तथा नन्ही पुत्री वाम्या पुरी, जिनकी आँखों में आज गौरव और गर्व की आभा स्पष्ट झलकती है।
*संवाददाता अनिल कुमार निघासन लखीमपुर खीरी*











