November 2, 2026 9:47 pm

महाराष्ट्र समाचार: BKC में फर्जी PMO पहचान पत्र से हाई-सिक्योरिटी इलाके में घुसने की कोशिश, हथियारबंद बॉडीगार्ड के साथ दो गिरफ्तार; तीसरा आरोपी फरार

मुंबई | 9 सितंबर 2026

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मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से ठीक पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा मामला सामने आया। जियो वर्ल्ड प्लाजा में कथित तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़ा होने का दावा करते हुए संदिग्ध पहचान पत्र के आधार पर प्रवेश करने की कोशिश करने वाले दो लोगों को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने एक आरोपी के साथ मौजूद निजी सुरक्षा गार्ड के पास से लाइसेंसी रिवॉल्वर और छह जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं। मामले में शामिल एक अन्य व्यक्ति अभी फरार बताया जा रहा है।

संदिग्ध PMO पहचान पत्र ने खींचा सुरक्षा कर्मियों का ध्यान

पुलिस के अनुसार घटना सोमवार शाम की है। BKC स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में प्रवेश के दौरान एक युवक ने कथित तौर पर खुद को PMO से जुड़ा अधिकारी बताया और मोबाइल फोन पर मौजूद पहचान पत्र दिखाया। पहचान पत्र को लेकर सुरक्षा कर्मचारियों को संदेह हुआ। इसी दौरान उसके साथ मौजूद व्यक्ति के पास हथियार होने की जानकारी सामने आने के बाद सुरक्षा टीम सतर्क हो गई।

जांच में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 24 वर्षीय रोहन प्रेमल पारिख, निवासी खार, और 49 वर्षीय दिलीप राजाराम कुंडे, पूर्व सैन्यकर्मी और पारिख के निजी बॉडीगार्ड के रूप में हुई है। कुंडे के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर और छह जिंदा कारतूस मिले। तीसरे आरोपी की पहचान प्रथमेश गणेश बागुल के रूप में हुई है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

CCTV से खुला पूरा रास्ता

सुरक्षा कर्मियों को संदेह होने के बाद पुलिस ने मौके के CCTV फुटेज खंगाले। जांच में आरोपियों के आने वाले वाहन की जानकारी मिली और उसके आधार पर पुलिस ने रोहन पारिख तक पहुंच बनाई। बाद में पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और हथियार भी बरामद किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच मुंबई क्राइम ब्रांच की Crime Intelligence Unit (CIU) को सौंप दी गई है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

फर्जी पहचान पत्र कहां से आया? जांच का अहम सवाल

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध PMO पहचान पत्र आखिर तैयार किसने किया और आरोपियों को यह दस्तावेज किस माध्यम से मिला। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी वास्तव में किसी धोखाधड़ी का शिकार हुआ था या जानबूझकर फर्जी सरकारी पहचान का इस्तेमाल कर रहा था।

अदालत में आरोपी के वकील की ओर से यह दावा भी किया गया कि रोहन पारिख को कथित तौर पर PMO में नौकरी का ऑफर मिलने और दस्तावेज दिए जाने के बाद वह खुद भी ठगी का शिकार हो सकता है। इस दावे की पुलिस जांच कर रही है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

PM मोदी के कार्यक्रम से कनेक्शन पर पुलिस का बड़ा स्पष्टीकरण

घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के BKC में निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले हुई, जिसके कारण सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी तक आरोपियों या इस घटना का प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है। इसलिए जांच फिलहाल फर्जी पहचान पत्र, अनधिकृत प्रवेश, हथियार की मौजूदगी और फरार आरोपी की भूमिका के आसपास केंद्रित है।

इस मामले ने BKC जैसे हाई-सिक्योरिटी इलाके में पहचान-पत्रों की जांच और प्रवेश व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज की पूरी कड़ी कहां से शुरू हुई और इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है या नहीं।

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