November 2, 2026 9:46 pm

खबर: BMC के 79 नगरसेवकों की कुर्सी पर कानूनी चुनौती, RTI खुलासे से मुंबई की सियासत में हड़कंप

मुंबई महाराष्ट्र ब्यूरो चीफ योगेश यादव

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मुंबई महानगरपालिका चुनाव के बाद अब राजनीतिक लड़ाई ने कानूनी मोड़ ले लिया है। RTI से सामने आई जानकारी के मुताबिक BMC के कुल 227 नगरसेवक पदों में से 79 निर्वाचित उम्मीदवारों के चुनाव को अलग-अलग आधार पर चुनौती दी गई है। इन मामलों ने महानगरपालिका की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार इन चुनाव याचिकाओं में जाति प्रमाणपत्र की वैधता, चुनावी हलफनामे में कथित विसंगतियां, आपराधिक मामलों की जानकारी और संपत्ति या वित्तीय विवरण से जुड़ी कथित कमियां जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम फैसला संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

विशाखा राउत प्रकरण के बाद मामला गरमाया

पूर्व मुंबई महापौर और शिवसेना (UBT) की नगरसेविका विशाखा राउत की सदस्यता रद्द होने के बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया है। राउत ने BMC के वार्ड 191 से OBC महिला आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ा था। पालघर जाति प्रमाणपत्र जांच समिति द्वारा उनका OBC प्रमाणपत्र अमान्य किए जाने के बाद उनकी नगरसेवक पद की सदस्यता समाप्त कर दी गई।

महाराष्ट्र सरकार के आदेश के बाद उन्हें छह वर्ष तक चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस मामले को लेकर राउत ने राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है।

79 मामलों में आगे क्या होगा?

RTI से मिली जानकारी के मुताबिक 79 चुनाव याचिकाओं में से पांच मामलों में अब तक चुनाव निरस्त किए जा चुके हैं, जबकि बाकी मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सभी 79 नगरसेवकों की सदस्यता खतरे में तय हो चुकी है; उनके मामलों का परिणाम संबंधित अदालतों और सक्षम प्राधिकरणों के फैसले पर निर्भर करेगा।

इन मामलों में विपक्ष से जुड़े नगरसेवकों की संख्या भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार 79 चुनौती वाले मामलों में 42 सीटें विपक्षी दलों से जुड़ी हैं, जिससे भविष्य में BMC के राजनीतिक समीकरण पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

BMC की राजनीति पर बढ़ा दबाव

एक तरफ पूर्व महापौर विशाखा राउत की सदस्यता रद्द होने से राजनीतिक विवाद तेज है, वहीं दूसरी तरफ दर्जनों चुनाव याचिकाओं की कानूनी सुनवाई ने BMC की नई सत्ता व्यवस्था को भी दबाव में ला दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन 79 मामलों में अदालतों और संबंधित प्राधिकरणों के फैसले क्या आते हैं। यदि किसी नगरसेवक का चुनाव रद्द होता है, तो संबंधित वार्ड के प्रतिनिधित्व और BMC के राजनीतिक गणित पर उसका सीधा असर पड़ सकता है।

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