महाराष्ट्र ब्यूरो चीफ योगेश यादव
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुंबई: सोशल मीडिया पर हम रोजाना तरह-तरह के वीडियो देखते हैं। कुछ वीडियो हमें किसी जगह की सच्चाई दिखाने का दावा करते हैं, तो कुछ वीडियो लोगों के अंदर उत्सुकता पैदा कर देते हैं। कई बार यही उत्सुकता इंसान को ऐसी जगह तक ले जाती है, जहाँ जाना उसके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
मैंने भी सोशल मीडिया पर कामाठीपुरा से जुड़े कई वीडियो देखे थे। उन वीडियो को देखने के बाद मेरे मन में सवाल उठा कि आखिर वास्तविकता क्या है? सोशल मीडिया पर जो दिखाया जा रहा है, क्या वास्तव में जमीन पर भी वैसा ही है?
इसी सवाल का जवाब जानने के लिए मैं खुद कामाठीपुरा इलाके में गया।
मैंने वहां काफी देर तक इलाके में घूमकर स्थिति को समझने की कोशिश की। कई तरह के लोग मिले और कई ऐसी चीजें भी नजर आईं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से बताना उचित नहीं है। लेकिन इसी दौरान हमारे साथ ऐसी घटना हुई, जिसने हमें यह समझा दिया कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर चीज के पीछे जाना कितना खतरनाक हो सकता है।
कुछ दूर जाने के बाद हमने स्कूली बैग का सहारा लिया, ताकि हम आम लोगों की तरह इलाके को देख सकें। इसी दौरान कुछ लोग हमारे पास आने लगे। वे हमें अलग-अलग जगह चलने के लिए कहने लगे और तरह-तरह के ऑफर देने लगे।
एक व्यक्ति ने विदेशी लड़की का हवाला देते हुए अलग-अलग रकम बतानी शुरू की। पहली नजर में पूरी स्थिति संदिग्ध लग रही थी। हमें पहले से अंदाजा था कि यहां कुछ भी हो सकता है। इसलिए हमने जानबूझकर अनजान बनकर उनकी बातों को समझने की कोशिश की।
एक-दो लोगों को मना करने के बाद जब तीसरा व्यक्ति हमारे पास आया तो हमने उसकी बात मानने का दिखावा किया और उसके साथ आगे बढ़ गए।
हमें एक कमरे तक ले जाया गया। वहां कुछ लड़कियां मौजूद थीं। बातचीत के दौरान हमें बाहर से जो रकम बताई गई थी, उससे बिल्कुल अलग माहौल नजर आया।
बाहर कीमत 500 रुपये बताई गई थी, लेकिन कमरे में पहुंचने के बाद अचानक स्थिति बदल गई।
दरवाजा बंद कर दिया गया और कुछ समय बाद वहां कई युवक आ गए। इसके बाद हमसे ज्यादा पैसे की मांग की जाने लगी। कोई हजारों रुपये की मांग कर रहा था। हमसे हमारी जेब, स्कूली बैग और मोबाइल तक चेक करने की बात कही गई।
उस वक्त हमें समझ आ गया कि मामला सामान्य नहीं है।
हमसे यह पता करने की कोशिश की गई कि हमारे पास कितने पैसे हैं। मोबाइल में भी पैसे देखने की कोशिश की गई। माहौल ऐसा बनाया गया कि सामने वाला व्यक्ति डर जाए और दबाव में आकर पैसे दे दे।
लेकिन हमें पहले से अंदाजा था कि ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए हमने घबराने के बजाय शांत रहने का फैसला किया।
उन लोगों ने डराने-धमकाने की कोशिश की, लेकिन जब उन्हें लगा कि हम घबरा नहीं रहे हैं तो उन्होंने बातचीत का रुख बदल दिया।
हमसे पूछा गया कि हम कहां के रहने वाले हैं।
हमने अपनी पहचान छिपाने के लिए कहा कि हम इसी इलाके के रहने वाले हैं। इसके बाद धीरे-धीरे उनका रवैया शांत हुआ और कुछ देर बाद वे वहां से चले गए।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक और गंभीर बात सामने आई।
हम वहां ग्राउंड पर सच्चाई जानने के लिए गए थे और हमारे पास इस अनुभव से जुड़े कुछ वीडियो भी थे। लेकिन जब मोबाइल को पैसे की जांच के लिए अपने कब्जे में लेने की कोशिश की गई, तो सुरक्षा के लिहाज से हमें अपने रिकॉर्ड किए गए वीडियो को हटाना पड़ा।
यानी जिस सच्चाई को कैमरे में कैद करने के लिए हम वहां गए थे, वही रिकॉर्डिंग हमारे लिए जोखिम बन सकती थी।
सोशल मीडिया देखकर वहां जाने वालों के लिए चेतावनी
इस घटना के बाद मेरी सबसे बड़ी अपील उन युवाओं और बाहर से मुंबई आने वाले लोगों से है जो सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो देखकर किसी जगह की वास्तविकता खुद देखने निकल पड़ते हैं।
सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड का वीडियो देखकर यह मत समझिए कि जमीन पर भी सब कुछ वैसा ही होगा।
कई वीडियो सिर्फ व्यूज और कमाई के लिए बनाए जाते हैं। उनमें खतरे, धोखे और वास्तविक स्थिति का पूरा सच नहीं दिखाया जाता।
खासकर बाहर से मुंबई में कमाने-खाने आने वाले युवा सावधान रहें। आपकी जेब में मेहनत की कमाई है। आपकी मासूमियत का कोई गलत फायदा उठा सकता है। आपको डराकर पैसे मांगे जा सकते हैं, आपके साथ मारपीट हो सकती है या आपका सामान छीना जा सकता है।
इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के बहकावे में आकर किसी अनजान कमरे या जगह पर बिल्कुल न जाएं।
अगर किसी जगह पर आपको लगे कि स्थिति संदिग्ध है, तो वहां से तुरंत सुरक्षित स्थान पर निकलें और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लें।
यह स्टोरी किसी जगह को बदनाम करने के लिए नहीं
यह रिपोर्ट किसी समुदाय या पूरे इलाके को बदनाम करने के उद्देश्य से नहीं है।
हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली चीजों को आंख बंद करके सच न मानें और अपनी सुरक्षा को सबसे पहले रखें।
मैं एक पत्रकार के तौर पर सच्चाई को जमीन पर जाकर समझने के उद्देश्य से वहां पहुंचा था। लेकिन इस अनुभव ने मुझे खुद यह एहसास कराया कि हर जगह की सच्चाई कैमरे में दिखने वाली कहानी जैसी नहीं होती।
मेरी अपील
सोशल मीडिया के चक्कर में अपनी सुरक्षा खतरे में न डालें।
अनजान लोगों के बहकावे में आकर अनजान जगह पर न जाएं।
अपनी मेहनत की कमाई और अपने मोबाइल जैसे जरूरी सामान की सुरक्षा करें।
और सबसे जरूरी बात—
अगर आप ऐसे किसी इलाके या स्थिति में फंस जाते हैं, तो हीरो बनने की कोशिश न करें। सुरक्षित तरीके से बाहर निकलें और जरूरत पड़ने पर पुलिस या भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लें।
यह जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, ताकि सोशल मीडिया की चमक देखकर कोई युवा अपनी सुरक्षा को खतरे में न डाले।











