November 3, 2026 12:29 am

महाराष्ट्र में चीनी के दामों में तेज उछाल, ₹80 किलो तक पहुंची कीमत; कई स्टोर्स ने बिक्री पर लगाई सीमा

महाराष्ट्र , ब्यूरो चीफ योगेश यादव

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महाराष्ट्र समेत देशभर में चीनी की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खुले बाजार में महाराष्ट्र के कई इलाकों में चीनी का खुदरा भाव करीब ₹75 से ₹80 प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं, कुछ बड़े सुपरमार्केट और स्टोर्स में बढ़ती मांग और संभावित जमाखोरी को देखते हुए एक ग्राहक को केवल 1 से 2 किलो तक चीनी देने की सीमा तय की गई है।

बाजार में अचानक बढ़ी मांग के बीच थोक कीमत भी ऊपर पहुंच गई है। महाराष्ट्र के खुले बाजारों में चीनी का थोक भाव करीब ₹7,500 प्रति क्विंटल बताया जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक आगामी गणेशोत्सव और त्योहारी सीजन के कारण चीनी की मांग में तेजी आई है। इसके साथ ही आपूर्ति और बाजार में उपलब्ध स्टॉक को लेकर बनी स्थिति का असर भी कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

एक महीने में ₹7.52 प्रति किलो बढ़े दाम

देशभर के स्तर पर भी चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹48.18 प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गई। यानी सिर्फ एक महीने में कीमत में ₹7.52 प्रति किलो की बढ़ोतरी, करीब 15.6 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया।

इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। त्योहारों के दौरान मिठाई, प्रसाद और अन्य खाद्य सामग्री में चीनी की खपत बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में मांग और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

सरकार ने कच्ची चीनी के आयात के नियम बदले

बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर के TRQ (टैरिफ रेट कोटा) आयात से संबंधित व्यवस्था में बदलाव किया है।

नए नियम के अनुसार TRQ के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को अब बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर रिफाइन करके सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बेचने की व्यवस्था की गई है। इससे पहले इसके लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक तय अंतिम तारीख निर्धारित थी। नई व्यवस्था में प्रत्येक खेप के लिए अलग समयसीमा लागू होगी।

उत्पादन को लेकर भी सरकार की चिंता

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चीनी की बढ़ती कीमतों और उत्पादन को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक गन्ने की फसल पर अल नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियों का असर पड़ा है, जिसका प्रभाव भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों में भी कृषि और चीनी उत्पादन पर पड़ा है।

हालांकि सरकार के मुताबिक देश में चीनी की सालाना जरूरत करीब 280 लाख टन है और इसके मुकाबले भारत के पास 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है। ऐसे में सरकार की कोशिश उपलब्ध स्टॉक, आयात और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की है।

जमाखोरी रोकने के लिए दुकानों पर लिमिट

बढ़ती कीमतों के बीच कुछ बड़े स्टोर्स और सुपरमार्केट में ग्राहकों के लिए खरीद की सीमा भी लगाई गई है। कुछ जगहों पर एक ग्राहक को 1 या 2 किलो तक चीनी ही बेचने के नोटिस लगाए गए हैं। इसका उद्देश्य जमाखोरी और एक साथ बड़ी मात्रा में खरीदारी को रोकना तथा सभी ग्राहकों के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।

फिलहाल महाराष्ट्र में खुले बाजार में जहां कुछ जगहों पर चीनी ₹75 से ₹80 प्रति किलो तक पहुंच गई है, वहीं सरकारी आंकड़ों में देश की औसत खुदरा कीमत ₹55.70 प्रति किलो दर्ज की गई है। अलग-अलग शहरों, दुकानों और ब्रांड के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है। आने वाले दिनों में त्योहारी मांग, आपूर्ति और सरकार के नए आयात नियमों का चीनी की कीमतों पर क्या असर पड़ता है, इस पर बाजार की नजर बनी हुई है।

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