रिपोर्टर: योगेश यादव | पीएनपी न्यूज महाराष्ट्र
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सोनीपत/मुंबई: हर माता-पिता का सपना होता है कि जिन बच्चों को उन्होंने अपने खून-पसीने की कमाई से पाला-पोसा, पढ़ाया-लिखाया और जीवन की हर खुशी देने की कोशिश की, वही संतान उनके अंतिम समय में उनके साथ खड़ी रहे। लेकिन हरियाणा के सोनीपत से सामने आई एक घटना ने रिश्तों और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुंबई के रहने वाले 74 वर्षीय शिवचरण रामरतन गुप्ता का हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। सबसे भावुक करने वाली बात यह रही कि उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं पहुंच सकीं। उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता को अंतिम विदाई दी और अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए ऑनलाइन 5,100 रुपये भेज दिए।
मुंबई के सफल कारोबारी थे शिवचरण गुप्ता
जानकारी के अनुसार, शिवचरण गुप्ता मूल रूप से मुंबई के निवासी थे और कपड़े के कारोबार से जुड़े हुए थे। करीब डेढ़ वर्ष पहले वे अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ हरियाणा के सोनीपत के पश्चिम राम नगर स्थित समाज कल्याण शिक्षा समिति द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में रहने आए थे। कुछ समय पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था, जिसके बाद वे अकेले ही वहीं रह रहे थे।
पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी। मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
20 दिन पहले ही दी गई थी बेटियों को जानकारी
वृद्धाश्रम के प्रशासक आनंद कुमार के अनुसार, शिवचरण गुप्ता अपनी बेटियों से मोबाइल फोन पर नियमित रूप से बात करते थे। जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी, तब करीब 20 दिन पहले ही उनकी तीनों बेटियों को सूचना दे दी गई थी और पिता से मिलने आने का अनुरोध भी किया गया था।
इसके बावजूद कोई भी बेटी उनसे मिलने नहीं पहुंची। निधन के बाद भी उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कहा गया, लेकिन सभी ने अपनी-अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए आने में असमर्थता जताई।
वीडियो कॉल पर देखा पिता का अंतिम संस्कार
शिवचरण गुप्ता की बड़ी बेटी अनीता नेपाल में शिक्षिका हैं, दूसरी बेटी निशा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं, जबकि सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में अपने परिवार के साथ रहती हैं। तीनों विवाहित हैं।
जब कोई भी बेटी सोनीपत नहीं पहुंच सकी, तब वृद्धाश्रम प्रबंधन ने वीडियो कॉल की व्यवस्था की। तीनों बेटियों ने मोबाइल स्क्रीन पर अपने पिता के अंतिम संस्कार को देखा और वहीं से उन्हें अंतिम विदाई दी। बड़ी बेटी अनीता ने ऑनलाइन 5,100 रुपये भेजते हुए अनुरोध किया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाए। बाद में उन्होंने अंतिम संस्कार का वीडियो भी मंगवाया।
वृद्धाश्रम और स्थानीय लोगों ने निभाया बेटे का फर्ज
वृद्धाश्रम प्रशासन और स्थानीय लोगों ने मिलकर शिवचरण गुप्ता के अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने सभी धार्मिक परंपराओं के अनुसार उनका अंतिम संस्कार कराया। उपस्थित लोगों का कहना था कि जब अपनों ने साथ नहीं दिया, तब समाज ने आगे बढ़कर इंसानियत का फर्ज निभाया।
बेटियों की पढ़ाई और भविष्य के लिए लगा दी पूरी जिंदगी
वृद्धाश्रम प्रबंधन के मुताबिक, शिवचरण गुप्ता ने अपना पूरा जीवन अपनी तीनों बेटियों की पढ़ाई-लिखाई और बेहतर भविष्य बनाने में लगा दिया। उन्होंने कभी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटना नहीं सीखा। उनकी मेहनत का ही परिणाम था कि उनकी दो बेटियां शिक्षिका बनीं और अपने-अपने परिवारों में स्थापित हैं।
अस्थियां भी परिवार नहीं ले गया
पहले परिवार ने वृद्धाश्रम से अस्थियां सुरक्षित रखने को कहा था, लेकिन बाद में उन्होंने बताया कि उनके पास सोनीपत आने का समय नहीं है। इसके बाद परिवार ने अनुरोध किया कि शिवचरण गुप्ता की अस्थियों का विधि-विधान के साथ गंगा में विसर्जन कर दिया जाए।
रिश्तों पर उठे कई सवाल
यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक रिश्तों और बुजुर्गों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस पिता ने पूरी जिंदगी अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने में लगा दी, उसी पिता की अंतिम यात्रा में बेटियां शामिल नहीं हो सकीं। अब यह घटना सोशल मीडिया और समाज में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे परिवार तथा सामाजिक मूल्यों के बदलते स्वरूप से जोड़कर देख रहे हैं।











