रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या राबर्ट्सगंज सोनभद्र PNP news
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के शाहगंज में स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय सिर्फ बच्चों की पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि आजादी के संघर्ष की जीवंत विरासत भी है।वर्ष 1880 में अंग्रेजों द्वारा जेल के रूप में निर्मित इस ऐतिहासिक भवन में कभी स्वतंत्रता सेनानियों को कैद कर अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं। आज उसी परिसर में बच्चों की किलकारियां, प्रार्थना और पढ़ाई की गूंज सुनाई देती है, जो इतिहास और वर्तमान का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।
शाहगंज का 146 साल पुराना भवन
शाहगंज का यह 146 वर्ष पुराना भवन ब्रिटिश शासनकाल में तत्कालीन मिर्जापुर जनपद के महत्वपूर्ण कारागारों में शामिल था। स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, अंग्रेजी हुकूमत स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय क्रांतिकारियों और शासन का विरोध करने वालों को यहीं बंदी बनाकर रखती थी। विद्यालय परिसर में मौजूद विशाल नीम का पेड़ आज भी उस दौर की दर्दनाक यादों का मूक गवाह माना जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इसी पेड़ से कैदियों को बांधकर उन्हें यातनाएं दी जाती थीं।आजादी के बाद जेल स्कूल में तब्दील हुई
देश को आजादी मिलने के बाद इस जेल को बंद कर दिया गया और बाद में इसे सरकारी प्राथमिक विद्यालय में परिवर्तित कर दिया गया। तब से यह ऐतिहासिक भवन शिक्षा की अलख जगा रहा है। जिन दीवारों ने कभी गुलामी का दर्द देखा था, वहीं आज नई पीढ़ी के सपनों को पंख मिल रहे हैं। वर्तमान में विद्यालय में 121 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जो इसी विरासत के बीच शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
सन 1880 में बनी थी जेल
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनंद पाण्डेय ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय शाहगंज का भवन वर्ष 1880 में अंग्रेजी हुकूमत के दौर में जेल के रूप में बनाया गया था। आजादी के तुरंत बाद इसे विद्यालय में बदल दिया गया और तब से यह शिक्षा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यह ऐतिहासिक इमारत केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य धरोहर है। इसे संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों को उस संघर्ष और बलिदान से परिचित कराया जाना चाहिए, जिसकी बदौलत देश ने आजादी का सूरज देखा।











