रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या राबर्ट्सगंज सोनभद्र PNP news।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सोनभद्र। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सोनभद्र में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्ता पक्ष जहां अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं के सहारे जनता के बीच जाने की तैयारी में है, वहीं समाजवादी पार्टी ने सरकार की कथित विफलताओं और अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को चुनावी हथियार बनाने की रणनीति तैयार कर ली है।पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करते हुए चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी है।
सपा जिलाध्यक्ष राम निहोर यादव के अनुसार जिले के सभी 1662 बूथों पर 21-21 सदस्यीय कमेटियां गठित कर दी गई हैं। इसके अलावा 10 बूथों पर एक सेक्टर प्रभारी और 40 बूथों पर एक जोन प्रभारी नियुक्त किया गया है। जिले में 150 सेक्टर प्रभारी और 50 जोन प्रभारी लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा ब्लाक और बूथ स्तर पर माइक्रो बैठकें कर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की बूथ प्रबंधन रणनीति की काट के रूप में देख रहे हैं। जिले की चार विधानसभा सीटों में फिलहाल तीन पर भाजपा का कब्जा है, जबकि दुद्धी सीट सपा विधायक विजय सिंह गोंड़ के निधन के बाद रिक्त है। पार्टी इस सीट पर उनके परिवार के सदस्य को उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही है।सपा ने इस बार सबसे अधिक फोकस ओबरा विधानसभा क्षेत्र पर किया है, जिसे लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। पार्टी का दावा है कि लोकसभा चुनाव में अपनाए गए पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक माडल को विधानसभा चुनाव में भी दोहराया जाएगा।
एसआइआर के बाद मतदाता सूची से कटे वोटों के मुद्दे को भी पार्टी राजनीतिक रूप से भुनाने की तैयारी में है। जिलाध्यक्ष का कहना है कि पार्टी का लक्ष्य इस बार जिले की सभी चारों विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करना है। इसके लिए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के साथ स्थानीय मुद्दों और सरकार की कमियों को प्रमुखता से जनता के बीच ले जाया जाएगा।बूथ से लेकर जोन तक बिछाया संगठन का जाल
सपा ने चुनाव से पहले बूथ प्रबंधन को सबसे बड़ी ताकत बनाने का फैसला किया है। जिले के 1662 बूथों पर 21 सदस्यीय कमेटियां गठित की गई हैं। 150 सेक्टर प्रभारी और 50 जोन प्रभारी की तैनाती कर उन्हें क्षेत्र में सक्रिय कर दिया गया है। पार्टी का मानना है कि मजबूत बूथ संगठन, पीडीए समीकरण और स्थानीय मुद्दों के सहारे भाजपा को कड़ी चुनौती दी जा सकती है।











