रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या राबर्ट्सगंज सोनभद्र PNP news।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!म्योरपुर वन रेंज के चागा क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध लकड़ी तस्करों के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। रेंजर जबर सिंह के नेतृत्व में घेराबंदी कर विभाग की टीम ने बहुमूल्य सागौन और शीशम के बोटों (लकड़ी के लट्ठों) से लदे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रंगे हाथों दबोच लिया। वन कर्मियों को देखकर तस्कर मौके का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।वन विभाग की टीम ने बिना देर किए ट्रैक्टर और उस पर लदी अवैध लकड़ियों को अपने कब्जे में लेकर रेंज कार्यालय पहुंचाया, जहां पूरे माल को सीज कर दिया गया है। विभाग की इस अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र के वन माफियाओं और लकड़ी तस्करों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।
दरअसल, म्योरपुर और आसपास के जंगली इलाकों में पिछले काफी समय से हरे-भरे पेड़ों के अवैध कटान और बेशकीमती लकड़ियों की तस्करी की शिकायतें मिल रही थीं। इन गुप्त सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने अपनी खुफिया और गश्ती टीमों को अलर्ट मोड पर डाल दिया था। इसी कड़ी में गुरुवार को चागा क्षेत्र के जंगलों में संदिग्ध गतिविधियों और ट्रैक्टर के गुजरने की पुख्ता जानकारी मिली। रेंजर जबर सिंह ने फौरन टीम के साथ छापेमारी की।
जब टीम ने ट्रैक्टर को रोककर जांच की, तो उस पर भारी मात्रा में सागौन और शीशम की लकड़ियां लदी पाई गईं। चालक या मौके पर मौजूद लोग इन लकड़ियों के परिवहन से जुड़ा कोई भी वैध कागजात या वन विभाग का परमिट (प्रपत्र) पेश नहीं कर सके।वन संपदा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, तस्करों पर दर्ज होगा वन अधिनियम के तहत केस”
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) कमल कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधीनस्थ अधिकारियों को पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के सख्त निर्देश दिए हैं। डीएफओ ने साफ कहा कि वन संपदा की सुरक्षा हर हाल में की जाएगी और जंगलों के दोहन में संलिप्त किसी भी सफेदपोश या माफिया को बख्शा नहीं जाएगा।
वन विभाग ने अब फरार तस्करों और ट्रैक्टर मालिक की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान लगभग साफ हो चुकी है और उनके खिलाफ वन अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। हालांकि, घने जंगलों और दुर्गम रास्तों का फायदा उठाकर पैर पसार रहे इस बड़े तस्करी नेटवर्क पर पूरी तरह से नकेल कसना वन विभाग के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।











