Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
रेवाड़ी, 19 अगस्त जिला रिपोर्टर दीपक तिवारी
27 जून 2018 को बावल क्षेत्र के गांव मोहनपुरा से लापता हुई 9वीं कक्षा की छात्रा की तलाश अब तक अधूरी है। दो साल तक स्थानीय पुलिस व एसआईटी जांच के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया, लेकिन सात वर्षों बाद भी परिजनों को बच्ची के मिलने की उम्मीद ही बाकी है।
बीते दिनों स्कूल टीचर मनीषा हत्याकांड को लेकर उठी जनभावनाओं के बीच अब एक बार फिर मोहनपुरा की इस लापता छात्रा का मामला चर्चाओं में आ गया है। समाजिक स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी लंबी जांच प्रक्रिया के बावजूद मासूम का कोई सुराग क्यों नहीं मिल पाया।
इसी मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश खरखड़ा ने ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि यदि सरकार और जांच एजेंसियां गंभीरता दिखाएं तो इस प्रकरण में भी न्याय संभव है। उनका कहना है कि बेटियों की सुरक्षा का सवाल केवल एक परिवार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे पूरे समाज की प्राथमिकता बनाना होगा।
गौरतलब है कि बच्ची के लापता होने के बाद ग्रामीणों ने महीनों धरना-प्रदर्शन किया था। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं ने आश्वासन दिए, लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए। अब इस मुद्दे को लेकर फिर से चर्चाएं शुरू हुई हैं और लोग उम्मीद जता रहे हैं कि सरकार व सीबीआई इस ओर गंभीरता से कदम उठाएगी।
स्थानीय लोगों ने भी माना कि प्रकाश खरखड़ा की ओर से मुख्यमंत्री हरियाणा को टैग करते हुए एक्स (ट्वीटर) पर उठाई गई मांग समयोचित है और इससे एक पुराने, लेकिन बेहद संवेदनशील मामले को फिर से गति मिल सकती है।











