रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या राबर्ट्सगंज सोनभद्र PNP NEWS
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सोनभद्र।सोनांचल में रविवार रात से सोमवार तक हुई मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरसी। 24 घंटे में जिले में औसतन 64 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। राबर्ट्सगंज तहसील में सर्वाधिक 95 एमएम, ओबरा में 71, दुद्धी में 52 और घोरावल में 35 एमएम बारिश हुई।भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए और कई स्थानों पर आवागमन बाधित हो गया। डोडहर के मोखना में जर्जर पुलिया तेज बहाव में बह गई, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया।
बीजपुर क्षेत्र में जरहा-अंजीर नदी के उफान से डोडहर, डुमरचुआ और दिग्गुल को जोड़ने वाले मार्ग की पुलिया बह गई। इससे डोडहर, जरहा और दिग्गुल सहित आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। स्कूली बच्चों, मजदूरों और ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया की मरम्मत के लिए कई बार शिकायत की गई, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। तेज बारिश के कारण खेतों और बंधों को भी नुकसान पहुंचा।जरहा-चेतवा क्षेत्र में बंधा टूटने से कई बीघे धान की फसल मिट्टी और बालू में दब गई। परसोई में बिजुल नदी पर बने पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया। यह मार्ग ओबरा से बेलगड़ी होते हुए मध्य प्रदेश को जोड़ता है।
पहाड़ी नदियां उफान पर, बढ़ा खतरा
जुगैल क्षेत्र में बिजुल नदी के छलके पर पानी बढ़ने के बावजूद ग्रामीण जोखिम लेकर आवागमन कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार छलके पर एक से दो फीट पानी आने के बाद तेज बहाव और फिसलन के कारण हादसे की आशंका रहती है।
वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण लोग मजबूरी में नदी पार करते हैं। बिजुल नदी का जलस्तर बढ़ने से छलका खतरनाक हो गया है। इसके बावजूद कुछ ग्रामीण लकड़ी पकड़कर पानी पार करते नजर आए।खाड़पाथर स्थित प्राकृतिक नाले का पानी कई घरों में घुसा
रेणुकूट क्षेत्र में खाड़पाथर स्थित प्राकृतिक नाले का पानी कई घरों में घुस गया। बाबूराम सिंह डिग्री कालेज मार्ग पर जलभराव से विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी हुई। अनपरा में जलभराव के कारण कोयला खदानों में भारी मशीनों का संचालन और कोयला निकासी प्रभावित रही।
मुख्य मार्ग के गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों को भी दिक्कत हुई। चोपन क्षेत्र में लगातार बारिश से सोन नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। नदी के किनारों तक पानी पहुंचने से आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई है। तेज बहाव के कारण विषैले जीव-जंतुओं के आबादी वाले क्षेत्रों में आने की आशंका भी बनी हुई है। पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रही।











