रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या pnp news राबर्ट्सगंज सोनभद्र
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ओबरा (सोनभद्र)। जनपद सोनभद्र सहित मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश के असर से रिहन्द बांध का जलस्तर बढ़ने लगा है। बीते तीन दिनों से बांध के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे इस पर निर्भर तापीय बिजली परियोजनाओं के लिए राहत की उम्मीद जगी है।जानकारों का मानना है कि यदि कैचमेंट एरिया में इसी तरह बारिश होती रही तो वर्षभर बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहने की संभावना बढ़ जाएगी। रिहन्द बांध का पानी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में संचालित कई बड़ी तापीय बिजली परियोजनाओं के लिए जीवनरेखा माना जाता है।
इन परियोजनाओं में बिजली उत्पादन के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बांध के पानी का उपयोग किया जाता है। ऐसे में जलस्तर में होने वाला उतार चढ़ाव सीधे तौर पर बिजली उत्पादन को प्रभावित करता है। इस वर्ष मानसून के शुरुआती दौर में रिहन्द बांध के कैचमेंट एरिया में अपेक्षित बारिश नहीं होने से जलस्तर लगातार गिरता रहा।पिछले वर्ष की तुलना में जुलाई के मध्य तक जलभराव की स्थिति काफी कमजोर रही। इसका परिणाम यह हुआ कि 20 जुलाई की सुबह तक बांध का जलस्तर घटकर 841.4 फीट पर पहुंच गया था, जिसे लेकर बिजली परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों में चिंता बढ़ने लगी थी। हालांकि 20 जुलाई से कैचमेंट एरिया और आसपास के क्षेत्रों में शुरू हुई झमाझम बारिश ने स्थिति बदलनी शुरू कर दी। लगातार हो रही वर्षा के कारण बांध में पानी की आवक तेज हो गई और जलस्तर में वृद्धि दर्ज होने लगी।
महज तीन दिनों के भीतर ही रिहन्द बांध का जलस्तर 841.4 फीट से बढ़कर 23 जुलाई की सुबह 843.1 फीट तक पहुंच गया। यानी इस अवधि में जलस्तर में करीब 1.7 फीट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मानसून का यह रुख यदि आगामी दिनों में भी बना रहता है और कैचमेंट एरिया में लगातार अच्छी बारिश होती है तो रिहन्द बांध तेजी से भर सकता है।इससे न केवल तापीय बिजली परियोजनाओं को वर्षभर पर्याप्त जल उपलब्ध होगा, बल्कि प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिलेगी। जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी को ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों और बिजली परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों की निगाहें अब मानसून की आगामी गतिविधियों और बांध में आने वाले पानी के आवक पर टिकी हुई है।











